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MAHIMA SHREE's Discussions (1,151)

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"वर्तमान घटना को बहुत सुंदर चित्रण किया आपने बधाई"

MAHIMA SHREE replied Apr 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-1 (विषय: दीवार)

1645 May 1, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"बहुत बढ़िया .. बधाई आपको"

MAHIMA SHREE replied Apr 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-1 (विषय: दीवार)

1645 May 1, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"बहुत सुंदर लिखा है आपने आँखे नम हो गई"

MAHIMA SHREE replied Apr 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-1 (विषय: दीवार)

1645 May 1, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"प्राचीन काल में कछुआ और खरगोश बहुत ही अच्छे मित्र हुआ करते थे । एक बार दौड़ में कछु…"

MAHIMA SHREE replied Apr 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-1 (विषय: दीवार)

1645 May 1, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

प्रधान संपादक

"ओबीओ के पाँच वर्ष पूरे हो गए...वाह वाकई बेहद खुशी की बात है ..आदरणीय योगराज सर , आ.…"

MAHIMA SHREE replied Apr 1, 2015 to ओबीओ की पाँचवीं वर्षगांठ पर : दो शब्द

48 Apr 6, 2015
Reply by VIRENDER VEER MEHTA

"बड़े नाज़ुक मरासिम है वफ़ा की डोर से बाँधों मेरी मानो न फूलों को अना की डोर से बाँधों  …"

MAHIMA SHREE replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"धागा मुहब्बत का मेरी इतना नहीं है कच्चा तेरे दुखों का भार मन की डोर से उठा लूँ... खू…"

MAHIMA SHREE replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"डोर है ,डोर है ,डोर डोर का जोर है ,डोर डोर में जोर है , जीवन की डोरी है,माँ की लोरी…"

MAHIMA SHREE replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"डोर दिखे न दिखे खिंचाव महसूस करेंगे ही सभी आज नही तो कल , हमेशा नहीं तो कभी न कभी...…"

MAHIMA SHREE replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"वाह... बहुत ही सुंदर... दोहावली .हार्दिक बधाईयां आपको... आदरणीय अखिलेश कृष्ण जी"

MAHIMA SHREE replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

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