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Harjeet Singh Khalsa's Discussions (198)

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"ग़ज़ल पूर्व प्रकाशित होने के फलस्वरूप और ओ बी ओ नियम के अनुपालन में प्रबंधन स्तर से ग़ज़…"

Harjeet Singh Khalsa replied Dec 27, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"बारूद कहीं फैला लाज़िम ही हवाओं में दिखने लगी बैचैनी अब नन्हीं बयाओं में.... Waah....…"

Harjeet Singh Khalsa replied Dec 27, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"Bahut Acchi Ghazal... :)"

Harjeet Singh Khalsa replied Dec 27, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"तारे भी नहीं आये तुमने भी नहीं देखा!ये चाँद बहुत भटका सावन की घटाओं में!!.... Shand…"

Harjeet Singh Khalsa replied Dec 27, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"Dil Ko Chhu Gaya ye sher Sir Ji... अंजाम खुदा जाने नादान तमन्ना काइक दीप जलाया है ह…"

Harjeet Singh Khalsa replied Dec 27, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"है शिद्दते ग़म दिल में इतना कि झुका के सर हर शख़्स यहाँ माँगे बस अम्न दुआओं में Mas…"

Harjeet Singh Khalsa replied Dec 27, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"Achhi Ghazal... Mohan Ji.."

Harjeet Singh Khalsa replied Dec 27, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"तौबा! ये मुहब्बत ही, बन बैठी सवाले-जां माँगा था कभी इसको, दिन रात दुआओं में  "पत्थर…"

Harjeet Singh Khalsa replied Dec 27, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"खोजो उसे शिद्दत से पोशीदा तुम्हीं में है   बाहर नहीं मिलता है, पर्वत में, खलाओं में …"

Harjeet Singh Khalsa replied Dec 27, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"Bahut Accha Kaha hai Sir Ji... Badhai... :)"

Harjeet Singh Khalsa replied Dec 27, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

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