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Dr.Prachi Singh's Discussions (3,905)

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"कभी कभी वैयक्तिक अपेक्षाएं कितनी सतही हुआ करती हैं... और तो और इनका अंतहीन जंगल... ब…"

Dr.Prachi Singh replied May 9, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-55

925 May 10, 2015
Reply by जितेन्द्र पस्टारिया

"मनभावन प्रस्तुति आ० मिथिलेश जी  सभी की अपेक्षाओं को प्रस्तुत कर दिया आपने और साथ ही…"

Dr.Prachi Singh replied May 9, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-55

925 May 10, 2015
Reply by जितेन्द्र पस्टारिया

"आदरणीय डॉ० विजय प्रकाश शर्मा जी  मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति... विकृत हो चुके बेजान रिश्त…"

Dr.Prachi Singh replied May 9, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-55

925 May 10, 2015
Reply by जितेन्द्र पस्टारिया

"आदरणीय डॉ० विजय शंकर जी  ब्रह्माण्ड सन्निहित हर तत्व की पारस्परिक निर्भरता और संतुलन…"

Dr.Prachi Singh replied May 9, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-55

925 May 10, 2015
Reply by जितेन्द्र पस्टारिया

"अपेक्षाएं तो सदा से ही मूल व्यवहार का बदल ही देती हैं.... मूल व्यवहार प्रेम, सौहार्द…"

Dr.Prachi Singh replied May 9, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-55

925 May 10, 2015
Reply by जितेन्द्र पस्टारिया

"आदरणीय सौरभ जी, यथार्थ को प्रस्तुत करते बहुत ही कथ्यसान्द्र व सार्थक शब्दचित्र उकेरे…"

Dr.Prachi Singh replied May 9, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-55

925 May 10, 2015
Reply by जितेन्द्र पस्टारिया

"आदरणीय आखिलेश जी  समाज के विभिन्न वर्गों में अपेक्षित व्यवहार और उसके विचलन को दोहों…"

Dr.Prachi Singh replied May 8, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-55

925 May 10, 2015
Reply by जितेन्द्र पस्टारिया

"जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं आदरणीय गणेश "बागी" जी"

Dr.Prachi Singh replied May 4, 2015 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"सच है कि माँ के सीने पर बोझ तो असहनीय है...पर माँ कभी विनाश नहीं करती इस बिंदु पर लघ…"

Dr.Prachi Singh replied Apr 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-1 (विषय: दीवार)

1645 May 1, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"विषम समय में अपने भाई को लेने भागना और आँगन की दीवार का गिरना..  सामयिक परिदृश्य को…"

Dr.Prachi Singh replied Apr 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-1 (विषय: दीवार)

1645 May 1, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

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घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
12 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

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दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
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"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
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Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
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रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
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