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दिगंबर नासवा's Discussions (471)

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"संग यारों के वफ़ा की बात करते हो सदा,जो न पीया होली में तो बेवफ़ा हो जायेगा,   पिला क…"

दिगंबर नासवा replied Mar 16, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-९ ( Now Closed )

641 Mar 17, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"समा तो आपने भी बाँध दिया पाख़ी जी आज ..."

दिगंबर नासवा replied Mar 16, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-९ ( Now Closed )

641 Mar 17, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"ए हसना अपनी जुल्फों को ज़रा महफूज़ रख विग अगर सर से उड़ा तो बलवला हो जायेगावाह वाह ...व…"

दिगंबर नासवा replied Mar 16, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-९ ( Now Closed )

641 Mar 17, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"शेष धर जी आज तो राज़ खुलने ही दो .... ज़्यादा ज़्यादा बाहर सोना पढ़ेगा रात में ...भा…"

दिगंबर नासवा replied Mar 16, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-९ ( Now Closed )

641 Mar 17, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"वीनस कहाँ है भाई तुम्हारे चरण .... कितना ज्ञान रखते हो भाई .... पव्वे का असल ज्ञान त…"

दिगंबर नासवा replied Mar 16, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-९ ( Now Closed )

641 Mar 17, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"जय हो ...."

दिगंबर नासवा replied Mar 16, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-९ ( Now Closed )

641 Mar 17, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"सूख गए हैं आंसू उसकी आँखों के अब तो , बेपनाह दर्द उस शख्स ने यूँ झेला लगता है  क्या…"

दिगंबर नासवा replied Feb 24, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-८ ( Now closed )

380 Feb 26, 2011
Reply by वीनस केसरी

"शाम ढले इस सूने घर में मेला लगता  है दर्द-ए-गम में कोना-कोना डूबा लगता है ... बहुत ह…"

दिगंबर नासवा replied Feb 24, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-८ ( Now closed )

380 Feb 26, 2011
Reply by वीनस केसरी

"हरकीरत जी ... बहुत  बहुत शुक्रिया .."

दिगंबर नासवा replied Feb 24, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-८ ( Now closed )

380 Feb 26, 2011
Reply by वीनस केसरी

"आंधी और तुफानो से लड़ना हमको आता है हिम्मत  अगर जवां हो  हर पर्वत पहाड़ कहे , जीवन द…"

दिगंबर नासवा replied Feb 24, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-८ ( Now closed )

380 Feb 26, 2011
Reply by वीनस केसरी

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चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
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Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
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Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
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