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राज़ नवादवी's Discussions (490)

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"बहुत खूब- //जाते हुए लम्‍हों का भरपूर मज़ा ले लो इक बार गयी रुत ये कब लौट के आनी है/…"

राज़ नवादवी replied Oct 28, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा"अंक २८ (Closed with 649 Replies)

649 Oct 30, 2012
Reply by योगराज प्रभाकर

"उफ्फ़, बड़ा दर्द और गहरा सोज़ है इस शेर में- //जो लाडली थी इक दिन, इक नूर सी छलकी थी, अ…"

राज़ नवादवी replied Oct 28, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा"अंक २८ (Closed with 649 Replies)

649 Oct 30, 2012
Reply by योगराज प्रभाकर

"क्यां कहने हैं जनाब लतीफ़ खान साहेब, तकरीबन सभी अशार काबिलेदाद है. ये दो अशआर कुछ खास…"

राज़ नवादवी replied Oct 28, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा"अंक २८ (Closed with 649 Replies)

649 Oct 30, 2012
Reply by योगराज प्रभाकर

"बहुत खूब खैराबादी साहेब.. //गम लाख शफाअत हों हम शौक़ से सह लेंगेबस प्यार मोहब्बत में…"

राज़ नवादवी replied Oct 28, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा"अंक २८ (Closed with 649 Replies)

649 Oct 30, 2012
Reply by योगराज प्रभाकर

"पूरी गज़ल काबिले तारीफ़ है भाई हसरत साहेब... //इस ग़म का सबब क्या हे लो तुम को बताता हू…"

राज़ नवादवी replied Oct 28, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा"अंक २८ (Closed with 649 Replies)

649 Oct 30, 2012
Reply by योगराज प्रभाकर

"ये दौरे गरानी भी क्या दौर-ए-गरानी है lहै खून जहाँ सस्ता महंगा वहीं पानी है ll बहुत ख…"

राज़ नवादवी replied Oct 28, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा"अंक २८ (Closed with 649 Replies)

649 Oct 30, 2012
Reply by योगराज प्रभाकर

"आदरणीय उमाशंकर जी, आपकी दाद और हौसलाअफजाई का तहेदिल से शुक्रिया! "

राज़ नवादवी replied Oct 28, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा"अंक २८ (Closed with 649 Replies)

649 Oct 30, 2012
Reply by योगराज प्रभाकर

"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय तिलकाराज जी आपके मार्गदर्शन का. सादर! "

राज़ नवादवी replied Oct 28, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा"अंक २८ (Closed with 649 Replies)

649 Oct 30, 2012
Reply by योगराज प्रभाकर

"अव्वल तो तरही मिसरे के शेर के आखरी रुक्न को लेकर उहापोह थी कि वो मुफाईलुन (१२२२) है…"

राज़ नवादवी replied Oct 28, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा"अंक २८ (Closed with 649 Replies)

649 Oct 30, 2012
Reply by योगराज प्रभाकर

"अंग्रेज़ी में इक शब्द है- वाओ! बस आपकी ये रचना पढके मुंह से यही निकला. क्या तत्सम पदा…"

राज़ नवादवी replied Oct 6, 2012 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - २४ (Now Closed)

931 Oct 9, 2012
Reply by Saurabh Pandey

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yesterday

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"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
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