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सदस्य टीम प्रबंधन

"आ० मिथिलेश जी  संकलन कर्म को मान देने के लिए आपका आभार..यकीनन इस बार का आयोजन बहुत ह…"

Dr.Prachi Singh replied Feb 17, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52 की समस्त रचनाओं का संकलन

24 Feb 18, 2015
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"बहुत खूबसूरत दोहे प्रस्तुत किये हैं आ० सरिता जी ....वाह! दोस्ती वाले दोहे में यदि दो…"

Dr.Prachi Singh replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"आ० लक्ष्मण धामी जी  हर एक दोहा विशेष है.... नेह पगे रिश्तों को जिस खूबसूरती से आपने…"

Dr.Prachi Singh replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"बहुत खूबसूरत अशआर कहे हैं आ० खुर्शीद जी  ये दो शेर ख़ास पसंद आये  ग़ज़ल को तुम चलो लेकर…"

Dr.Prachi Singh replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"आदरणीया राजेश कुमारी जी  पारस्परिक प्रीत की डोर को बहुत बारीकी से ग़ज़ल में अभिव्यक्त…"

Dr.Prachi Singh replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"आ० विजय शंकर जी  अजीब रस्सा कसी है ,जिंदगी भी कैसी कैसी डोर से बंधी है।जीवन तो बस तब…"

Dr.Prachi Singh replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"आ० गिरिराज भंडारी जी, यकीनन अदृश्य डोर से बंधे हुए हैं कई सम्बन्ध... इस सूक्ष्म भाव…"

Dr.Prachi Singh replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"आ० अखिलेश जी  मोह काम के जाल में, फँसकर मद में चूर। सांसारिक सुख ने किया, प्रभु से ह…"

Dr.Prachi Singh replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"अवश्य आ० मिथिलेश जी "

Dr.Prachi Singh replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी  आयोजन की शुरुवात आपके बहुत ही उन्नत गीत से हुई है.. कल से…"

Dr.Prachi Singh replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

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"कृपया गिरह में // वो ज़माना // को //अब ज़माना// पढ़ा जाए। धन्यवाद "
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Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
" आदरणीय अजय गुप्ता जी ग़ज़ल की मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए। तरही मिसरे पर आपका शेअर कमाल है।"
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