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दिगंबर नासवा's Discussions (471)

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"नयी ऊँचाइयों को छुआ है इस रचना में पने ... बहुत उम्दा भाव ..."

दिगंबर नासवा replied Dec 1, 2010 to "OBO लाइव महा इवेंट" अंक-2 (closed now)

1524 Dec 6, 2010
Reply by Navin C. Chaturvedi

"रात भर उनींदी सी रात ओढ़े जागती आँखों ने कुछ हसीन से ख्वाब जोड़े सुबह की आहट से पहले…"

दिगंबर नासवा replied Dec 1, 2010 to "OBO लाइव महा इवेंट" अंक-2 (closed now)

1524 Dec 6, 2010
Reply by Navin C. Chaturvedi

"निःशब्द हूँ साहब .. कमाल का लिखते हैं आप ..."

दिगंबर नासवा replied Dec 1, 2010 to "OBO लाइव महा इवेंट" अंक-2 (closed now)

1524 Dec 6, 2010
Reply by Navin C. Chaturvedi

"प्यार को लेकर आपका विवेचन भी बहुत अच्छा रहा रत्नेश जी ..."

दिगंबर नासवा replied Dec 1, 2010 to "OBO लाइव महा इवेंट" अंक-2 (closed now)

1524 Dec 6, 2010
Reply by Navin C. Chaturvedi

"नफरत का छुरा दिल में लाया जो छुपा के, तो क्यूँ यकीन मुझको दिलाता है प्रेम का ! २ मि…"

दिगंबर नासवा replied Dec 1, 2010 to "OBO लाइव महा इवेंट" अंक-2 (closed now)

1524 Dec 6, 2010
Reply by Navin C. Chaturvedi

"प्रेम की परिभाषा खोल कर रख दी आपने .. और साथ में ये ही कह दिया की इसको लिखना आसन नही…"

दिगंबर नासवा replied Dec 1, 2010 to "OBO लाइव महा इवेंट" अंक-2 (closed now)

1524 Dec 6, 2010
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"वाह डा. साहब .. प्रेम को खोल कर रख दिया है अपने ... बहुत लाजवाब ...."

दिगंबर नासवा replied Dec 1, 2010 to "OBO लाइव महा इवेंट" अंक-2 (closed now)

1524 Dec 6, 2010
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"नजाकत, नफासत, मुलामत से पालो खुदा की है ये दस्तकारी मुहब्बत मुहब्बत के दुश्मन भी है…"

दिगंबर नासवा replied Dec 1, 2010 to "OBO लाइव महा इवेंट" अंक-2 (closed now)

1524 Dec 6, 2010
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"दिल चीर के रख दिया आपने .... गजब का एहसास है पूरी ग़ज़ल में ..."

दिगंबर नासवा replied Dec 1, 2010 to "OBO लाइव महा इवेंट" अंक-2 (closed now)

1524 Dec 6, 2010
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"बहुत मधुर एहसास से जोड़ा है आपने इस प्रेम रचना को अनीता जी ... दिल को छू गयी ..."

दिगंबर नासवा replied Dec 1, 2010 to "OBO लाइव महा इवेंट" अंक-2 (closed now)

1524 Dec 6, 2010
Reply by Navin C. Chaturvedi

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