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"व्यवस्था पर चोट करती आपकी जानी पहचानी शैली में शानदार रचना   हार्दिक बधाई आदरणीय उस्…"

pratibha pande replied Feb 11, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आपका प्रकृति से प्रेम अक्सर आपकी रचनाओं में झलकता है प्रिय कल्पना जी।  बहुत खूबसूरत…"

pratibha pande replied Feb 11, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"चाहता मन खोलना पर है चुका-सा शब्द का विह्वल गहन रेला रुका-सा//    वाह    कंठ हो अवरु…"

pratibha pande replied Feb 11, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आओ आज कोई नया गीत गायें दिल से, सब मिलकर सद्भाव की जोत जलायें दिल से, बहुत लड़ लिये आ…"

pratibha pande replied Feb 11, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"गहन भावों से ओतप्रोत बहुत सुन्दर गीत सृजन पर हार्दिक बधाई प्रेषित है आदरणीय डॉ सुकुल…"

pratibha pande replied Feb 11, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"चारों ही क्षणिकाएँ  बहुत  उत्तम हैं   आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी  हार्दिक बधाई प्रेषित…"

pratibha pande replied Feb 11, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"वसंत के आगमन और   फाग की  तैयारी  को जीवंत कर दिया आपकी  इस मनोहारी   रचना ने। हार्द…"

pratibha pande replied Feb 11, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"सच्चाई जब स्वप्न हो गई, लगा जगत ही सारा नश्वर| अपनों ने भी आँखें फेरी , गिरा शीश पर…"

pratibha pande replied Feb 11, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

" वाह  वाह  बहुत खूब आदरणीय ओमप्रकाश जी  हार्दिक बधाई प्रेषित है "

pratibha pande replied Feb 11, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

" बहुत सही सच्ची बात  ओबीओ है ही ऐसा अद्भुत मंच। हार्दिक बधाई  इस प्रस्तुति पर आदरणीय…"

pratibha pande replied Feb 11, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

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२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
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Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
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