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Dr. Vijai Shanker's Discussions (1,850)

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"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी , आपकी सारगर्भित धनात्मक टिप्पणी के लिए ह्रदय से आभार औ…"

Dr. Vijai Shanker replied May 14, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , कविता , कहानी और शायरी पर आपकी सुरुचिपूर्ण पकड़ के ह…"

Dr. Vijai Shanker replied May 14, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"To Aadrneey Kanta Roy ji , " कि ये अँधेरे क्या हमारे ही रचे हुए है ? " आपका यह प्रश्…"

Dr. Vijai Shanker replied May 14, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"आदरणीय सौरभ पांडेय जी , रचना महोत्सव के अनुकूल हो , उसकी शोभा बढ़ाये इससे अधिक और क्य…"

Dr. Vijai Shanker replied May 14, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"आदरणीय सतविंदर कुमार जी , आपकी उपस्थिति एवं प्रशस्ति के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवा…"

Dr. Vijai Shanker replied May 13, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी , आपकी उपस्थिति एवं सशक्त टिप्पणी के लिए ह्रदय से आभार ए…"

Dr. Vijai Shanker replied May 13, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"प्रारम्भ से कहाँ कहाँ होती हुयी कैसी रौशनी , विज्ञान , विकास सब देखती हुयी जिंदगी ,…"

Dr. Vijai Shanker replied May 13, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"दौड़ लगी जुगनू के पीछे ,भूले सब प्रकाश की खान। आदरणीय सुश्री प्रतिभा पांडे जी , बहुत…"

Dr. Vijai Shanker replied May 13, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी , सभी छः दोहे प्रभावशाली एवं आकर्षक , बधाई , सादर।"

Dr. Vijai Shanker replied May 13, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"आज प्रकृति छली गई है तुच्छ लोभ संग खली गई है डूब गई विकास तम में लालच से गली गई है।…"

Dr. Vijai Shanker replied May 13, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

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२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
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Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
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Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
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