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abhinav's Discussions (5)

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"आदरणीय गुरु जी चरण वंदना सुना था देखा नहीं था कि धरती पर स्वर्ग होता है वैसे तो मैं…"

abhinav replied Oct 15, 2010 to गज़लशाला ( आप भी जाने कि ग़ज़ल कैसे कही जाती है )

50 Jan 18, 2011
Reply by Admin

"आदरणीय अडमिन जी नम्सकार आपसे निवेदन है इस बार का "आज़र" साहिब द्वारा लिखा पाठ आपने…"

abhinav replied Sep 26, 2010 to गज़लशाला ( आप भी जाने कि ग़ज़ल कैसे कही जाती है )

50 Jan 18, 2011
Reply by Admin

"आदरणीया पूजा जी! नमस्कार !'राष्ट्रमंडल खेल : क्या देश की गरिमा बढेगी ?' आप ने यह सव…"

abhinav replied Sep 26, 2010 to राष्ट्रमंडल खेल : क्या देश की गरिमा बढेगी ?

9 Sep 26, 2010
Reply by abhinav

सदस्य टीम प्रबंधन

"mumtaj ji very nice ऐसी बढती गईं ग़म की तारीकियाँ मुंह छुपाती हुई हर ख़ुशी रह गई उस…"

abhinav replied Sep 19, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
Reply by योगराज प्रभाकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"मुमताज़ जी बेहतरीन ग़ज़ल"

abhinav replied Sep 19, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
Reply by योगराज प्रभाकर

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"आ. बृजेश जी, बहुत आभार आपका।"
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मन कैसे-कैसे घरौंदे बनाता है?

उषा अवस्थीमन कैसे-कैसे घरौंदे बनाता है?वे घर ,जो दिखते नहींमिलते हैं धूल में, टिकते नहींपर "मैं"…See More
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सदा - क्यों नहीं देते

221--1221--1221--1221आँखों में भरे अश्क गिरा क्यों नहीं देतेहै दर्द अगर सबको बता क्यों नहीं देते2है…See More
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"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर् आपके कहे अनुसार ऊला बदल लेती हूँ। ईश्वर आपका साया हम पर…"
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"जी सृजन के भावों को मान देने और त्रुटि इंगित करने का दिल से आभार । सहमत एवं संशोधित"
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"'सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो इंसाफ़ को फ़िर लोग सदा क्यों नहीं देते' ऊला यूँ…"
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"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर्, "बिना डर" डीलीट होने से रह गया।क्षमा चाहती…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छे दोहे हुए है। हार्दिक बधाई। लेकिन यह दोहा पंक्ति में मात्राएं…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
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Sushil Sarna posted a blog post

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Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"//सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो इंसाफ़ को फ़िर लोग बिना डर के सदा नहीं देते // सानी…"
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