For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय साथियो,

सादर नमन।
.
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-114 में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-114
विषय : अधूरे ख्वाब
अवधि : 29-09-2024 से 30-09-2024 
.
अति आवश्यक सूचना:-
1. सदस्यगण आयोजन अवधि के दौरान अपनी केवल एक लघुकथा पोस्ट कर सकते हैं।
2. रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना/ टिप्पणियाँ केवल देवनागरी फॉण्ट में टाइप कर, लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड/नॉन इटेलिक टेक्स्ट में ही पोस्ट करें।
3. टिप्पणियाँ केवल "रनिंग टेक्स्ट" में ही लिखें, 10-15 शब्द की टिप्पणी को 3-4 पंक्तियों में विभक्त न करें। ऐसा करने से आयोजन के पन्नों की संख्या अनावश्यक रूप में बढ़ जाती है तथा "पेज जम्पिंग" की समस्या आ जाती है। 
4. एक-दो शब्द की चलताऊ टिप्पणी देने से गुरेज़ करें। ऐसी हल्की टिप्पणी मंच और रचनाकार का अपमान मानी जाती है।आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है, किन्तु बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पाए इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है। देखा गया कि कई साथी अपनी रचना पोस्ट करने के बाद गायब हो जाते हैं, या केवल अपनी रचना के आस पास ही मंडराते रहते हैंI कुछेक साथी दूसरों की रचना पर टिप्पणी करना तो दूर वे अपनी रचना पर आई टिप्पणियों तक की पावती देने तक से गुरेज़ करते हैंI ऐसा रवैया कतई ठीक नहींI यह रचनाकार के साथ-साथ टिप्पणीकर्ता का भी अपमान हैI
5. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति तथा गलत थ्रेड में पोस्ट हुई रचना/टिप्पणी को बिना कोई कारण बताये हटाया जा सकता है। यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
6. रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका, अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल/स्माइली आदि लिखने/लगाने की आवश्यकता नहीं है।
7. प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार "मौलिक व अप्रकाशित" अवश्य लिखें।
8. आयोजन से दौरान रचना में संशोधन हेतु कोई अनुरोध स्वीकार्य न होगा। रचनाओं का संकलन आने के बाद ही संशोधन हेतु अनुरोध करें। 
.    
यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सकें है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.
.
.
मंच संचालक
योगराज प्रभाकर
(प्रधान संपादक)

Views: 369

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

स्वागतम

ख़्वाबों के मुकाम (लघुकथा) :


"क्यूॅं री सम्मो, तू झाड़ू लगाने में इतना टाइम क्यों लगा देती है? फटाफट दायें-बायें हाथ मार और छुट्टी ले काम से, मेरी तरह!"
"सड़कों और पार्क कीउन जगहों पर ध्यान से झाडू लगाती हूॅं बिट्टो, जहॉं तफ़री-मस्ती करने वाले लोग खाने-पीने की चीज़ें फैंक जाते हैं; कभी-कभी तो बिना झूठी या साबुत पैकेट में भी... वो भी कूड़ेदान से बाहर ही!"
"अच्छा ऐसा क्या-क्या मिल जाता है तुझे, बता तो ज़रा?"
"काजू-बादाम से लेकर अचार-चटनी तक और रोटी-पराठे से फल-सब्ज़ी तक! कुछ न कुछ, कभी कम कभी ज़्यादा!"
"तू तो ऐसे मुस्कुरा-मुस्कुरा के बता रही है, जैसे कि तू फ़िर से पेट से है?"
"हॉं, बिट्टो। तभी तो चिंता है अच्छा खाने-पीने की।"
"लेकिन यहॉं ज़मीन पर पड़ी चीज़ें नुकसान भी तो कर सकती हैं तुम्हें!"
"छॉंटा-बीनी आती है मुझे। साफ़-सफ़ाई भी। मुझे ऑंगनबाड़ी वाली दीदी ने सब तरीके समझा दिये। वो कहते हैं न हैल्थ, हाईजीन, सेनीटेसन...सब। क्या कैसे धोना और उबालना है, सब।"
"तो क्या तू उसे सब कुछ बता देती है, जो कूड़े-कचरे में से उठाती है, ऐं?"
"सपने बीनती हूॅं, उठाती हूॅं पगली; उसे क्यों बताऊॅंगी, तुझे बताया क्योंकि अच्छी सेहत के सपने तू भी देखती है, बिट्टो!"


(मौलिक व अप्रकाशित)

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी साहब जी।

आदाब।‌ बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब तेजवीर सिंह साहिब।

काल चक्र - लघुकथा - 

"आइये रमेश बाबू, आज कैसे हमारी दुकान का रास्ता भूल गये? बचपन में तो दिन में तीन चार बार अपनी मनपसंद टॉफ़ी लेने आते थे। अब तो दिखते ही नहीं हैं। टॉफ़ी निकाल दूँ क्या?" 

"नहीं, अब हम मीठा नहीं खाते जगदीश जी।चिकित्सक मना किया है। 

जगदीश ने समय के साथ परिवर्तन महसूस किया।बचपन में रमेश बाबू उसे काका कह कर पुकारते थे जबकि उस वक्त जगदीश जी जवान थे। अब वह सत्तर पार कर गये तो वही रमेश बाबू उसे नाम से पुकार रहे हैं।हो सकता है यह बदलाव रमेश बाबू में अब जमींदार घराने के बड़े मालिक बनने के बाद आया हो।

"जगदीश जी, क्या आप सिगरेट रखते हैं?”

"हाँ रखता तो हूँ। आजकल तो आधा गाँव सिगरेट पीने लगा है। आप कौनसी पीते हैं?”

 विल्स"

"विल्स तो नहीं है। मंगवा लूंगा।

"नहीं हमारा आदमी शहर गया है। ले आयेगा। अभी आपके पास जो भी हो निकाल दीजिये।" 

जगदीश ने एक डब्बी सिगरेट की निकाल कर दे दी।रमेश बाबू एक सिगरेट मुँह में दबा कर धुआँ उड़ाते अपनी हवेली की ओर चले जा रहे थे।

समय के साथ रमेश बाबू कितना बदल गये थे।एक समय था जब वे गाँव के सबसे होनहार युवक थे। हर क्षेत्र में आगे रहते थे।खेल कूद से लेकर शिक्षा तक ।

इतनी सारी खूबियों के मालिक होने के कारण एक सहपाठी महिला रमेश बाबू को दिल दे बैठी।उसका परिवार फौजी पृष्ठ भूमि से था। अतः वह लड़की भी रमेश बाबू को एक आर्मी अफसर के रूप में अपना हमसफर बनाना चाहती थी।

प्रेमिका के लिये उनकी भी चाहत थी कि आर्मी  अफ़सर बनें।चुने भी जा चुके थे। लेकिन इकलौती संतान होने के कारण पिता ने सेना में नहीं जाने दिया। 

पिता की तरह रमेश बाबू भी जिद्दी निकले।

पिता की बात मान ली लेकिन एक शर्त अपनी भी थोप दी। जिंदगी भर अविवाहित रहने की शर्त । 

बाप बेटे की जिद ने जमींदार परिवार को सदैव के लिये लावारिस कर दिया। 

मौलिक एवं अप्रकाशित

नमस्कार। अधूरे ख़्वाब को एक अहम कोण से लेते हुए समय-चक्र की विडम्बना पिरोती 'टॉफी से सिगरेट तक और सेना की नौकरी के अधूरे ख़्वाब से अविवाहित रहने तक की विसंगतियों वाली बढ़िया रचना हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय तेजवीर सिंह जी। अंतिम पंक्ति को प्रतिस्थापित किया जा सकता है किसी बेहतर पंचपंक्ति या पंच-संवाद से। जो विवरण देने वाले वाक्य बीच-बीच में या अंत में हैं उनके भावों को संवादों या कथनोपकथन में बयॉं किया जा सकता है मेरे विचार से।

हार्दिक आभार आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी साहब जी। आपकी सार गर्भित टिप्पणी मेरे लेखन को उत्साहित करती हैं।आपकी हिदायतों पर गौर करूंगा। पुनः आभार।

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय शेख शहजादजी शास्त्रीय गीत संगीत में रुचि न रखने वाले से अधिकतम सहयोग राशि (चंदा ) जबरदस्ती…"
1 minute ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"तरही मिसरे पर ग़ज़ल पर अच्छा प्रयास है आदरणीय। विस्तृत समीक्षा के लिए आदरणीय तिलकराज जी उपयोगी…"
3 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह-वाह, क्या छंद, क्या भाव, क्या अलंकरण। बहुत बहुत बधाई प्रतिभा जी। कोयल को न्यौता भिजवाया// क्या…"
7 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आभार आदरणीय उस्मानी जी "
11 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अनेक आभार प्रतिभा जी ।"
12 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीय "
15 minutes ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय दयाराम जी, ग़ज़ल की मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए, मार्गदर्शन तो विद्वान ही करेंगे। धन्यवाद "
19 minutes ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, ग़ज़ल की मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए "
23 minutes ago
Manan Kumar singh commented on Admin's group भोजपुरी साहित्य
"गजल आईं एगो नज़्म भइल बादेखीं सब रउए कइल बा।1 हहरल हियरा रउए खातिरइचिको ना एमे मइल बा।2 नयन मटक्का…"
23 minutes ago
सुरेश कुमार 'कल्याण' posted a blog post

कुंडलिया

दरियादिल हो बाप जब, करता कन्यादान।दयावान भगवान हो, रखता उसका मान।रखता उसका मान, भात नरसी-सा भरता।आठ…See More
1 hour ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय शाहज़ाद उस्मानी साहब , नमस्कार। हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया।"
1 hour ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"अजय गुप्ता जी, आपका सुझाव भी अच्छा लगा, इस पर विचार करती हूॅं आपने दूसरे मिसरे पर भी ध्यान दिया।…"
1 hour ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service