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बाबा हो बाबा ,
तू इ कईसन फसवलs,
चोर से कहत बाड़,
चोरी ना करे खातिर,
अगर चोरी कर लिहलस,
चाही कानून सजा देबे खातिर,
दुबिधा में डाल के,
माथा घुमाइलs,
बाबा हो बाबा,
तू इ कईसन फसवलs,
करोड़ों जे देश के पईसा,
लुट के धइले बाटे,
जे लुटले बाटे,
वोहमे जादे नेतवे बाटे,
कईसे उ करवाई करिहन,
नेता भईला के नाते,
तोहर चाल बा फसावे वाला,
खुबे फसवलs,
बाबा हो बाबा,
तू इ कईसन फसवलs,

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Replies to This Discussion

बाह-बाह रवि भाई.. रचना के इसारा निकहा स्पस्ट त बटले बा, रचनो जमगर बनल बा.

 

चोर से कहत बाड़ऽ,

चोरी जनि करे खातिर..

जवन  चोरी  कइये लिहलस,

चाहीं कानून सज़ा खातिर...       बात में दम बड़ुवे. 
हमार एगो सुझाव मनबऽ भाई तऽ ओहके सङे बाँटल चाहब. ..
bhaiya aadesh kari hamke
गुरु जी राउर एह रचना के कवनो जोड़ नईखे, बहुत बरियार रचना बा ,  देश में हो रहल गतिविधि पर राउर बहुत ही गड़ल नजर बा, बहुत बहुत बधाई एह रचना खातिर |

अपना कविता के माध्यम से अपने ऊ बात कह देनी जे भविष्य में भारत के अखबार उगले वाला बा....हा हा हा...अति-सुन्दर रचना बा राउर साथ ही बहुत ही सटीक भाविष्यवानी भी अपने कर देले बानी एह कविता में. कोटिशः धन्यवाद आ आभार एह रचना खातिर.

 

dhanyabad "raj" bhai

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