For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पापा जैसा चुनमुन

सोमवार स्कूल का आखिरी दिन था |कल से गर्मियों की छुट्टियाँ थीं |चुनमुन स्कूल-वैन से घर लौट रहा था| ड्राईवर (संवाहक ) अंकल गाना गा रहे थे और बस चलाए जा रहे थे |

“अंकल कल से आपकी भी छुट्टी पड़ गयी ?” चुनमुन ने पूछा

“हाँ |” ड्राईवर अंकल ने हँसते हुए कहा

“क्या आप कल से मुझे वैन चलाना सीखा दोगे ?”

“पर तुम वैन चलाना क्यों चाहते हो ?”

“वैन से मैं नानी के घर जाऊँगा |पर आप ये सीक्रेट किसी से मत कहना |”

“ठीक है नहीं कहूँगा |पर,इस बार तुम अपनी छुट्टियों के मज़े लो |जब तुम बड़े हो जाओगे तो मैं तुम्हें सीखा दूंगा |”

मंगलवार को वह माँ के साथ रिक्शे पर स्कूल पी.टी.एम. में आया |उसने देखा की सब लोग टीचर से बड़े प्यार और सम्मान से बात कर रहे थे |वो सोचने लगा-अगर वो अध्यापक बन जाए तो ना किताबे पढ़नी होगी,ना होमवर्क करना होगा |और वह काम न करने वाले बच्चों को डाँट भी लगा सकता है |उसने यह प्लान किसी को नहीं बताया |किसी ने टीचर को बता दिया तो उसकी खैर नहीं |

बुधवार शाम को वह दीदी के साथ उनकी क्लास टीचर की बेटी की जन्मदिन की पार्टी में गया |दीदी साईकिल चला रहीं थीं वह पीछे बैठा था |बर्थडे का चॉकलेट केक उसे बहुत अच्छा लगा |यह केक एक पेस्ट्री शॉप से आया था |चुनमुन सोचने लगा-“ मैं बड़ा होकर बड़ी सी पेस्ट्री शॉप खोलूँगा और अपनी पसंद की चॉकलेट,केक,पेस्ट्री बेरोक-टोक खाऊँगा |”

दीदी ने उसके इस सीक्रेट को न बताने के बदले शर्त रखी की वह उसकी पेस्ट्री-दुकान से रोज़ एक फ्री पेस्ट्री लेंगी |शर्त महँगी थी पर उसे भी तो केक खाना था |

गुरुवार को पापा दादी को लेकर अस्पताल जा रहे थे |

“डैडी मुझे भी चलना है आपके साथ |” चुनमुन ने जिद्द की तो पिताजी मना ना कर पाए |ऑटो-रिक्शा में बैठकर वे हॉस्पिटल पहुँचे |

वहाँ सफ़ेद कोट वाले डॉक्टर को मरीजों को सुई और स्टेस्कोप लगाता हुआ देख चुनमुन को बड़ा मज़ा आया |

अगर वो डॉक्टर बन जाए तो अपने सभी दोस्तों को सुई लगा सकता है |माँ जो सुई से डरती हैं वो भी उसे दूध पीने के लिए डाँटेगी नहीं |पर उसने यह बात पिताजी को नहीं बताई |पापा ने मम्मी को उसका प्लान बता दिया तो मुश्किल हो सकती है !

शुक्रवार को उसकी नींद खुली तो पिताजी परेशान नज़र आए |उनका ड्राइविंग लाइसेंस कल कहीं खो गया था |अब थाने जाकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवानी होगी |आँख मलता चुनमुन भी पिताजी की मोटर-साईकिल पर बैठ गया |पुलिस-स्टेशन में पुलिसवाले की बड़ी-बड़ी मूंछों और भारी आवाज़ से चुनमुन डरा हुआ था | |चोर-बदमाश भी पुलिस वाले से डर-डर कर बात कर रहे थे |

चुनमुन सोचने लगा-“अगर वो पुलिस-मैन  बन जाएगा तो बदमाश टींकू उसकी पतंग काटने की हिम्मत नहीं करेगा और मुन्नू किक्रेट में उसकी बारी दिए बिना नहीं भागेगा |”पर उसने यह प्लान किसी दोस्त को नहीं बताया |उससे पहले कोई और पुलिस बन गया तो !

शनिवार को सुबह-सुबह चुनमुन को पापा के साथ बड़े पार्क जाना था |पर जैसे ही वह निकले अगला टायर पंचर हो गया |दोनों पैदल मोटरसाईकिल धकेलते हुए मोटरसाईकिल-मिस्त्री के पास पहुँचे |दुकानवाले ने पंचर लगा दिया |मकैनिक की दुकान पर कई लोग अपनी गाड़ियाँ लाते और वह उनकी परेशानी सुन अपने लड़कों को उन्हें ठीक करने को कहता |

चुनमुन सोचने लगा की अगर वह बड़ा होकर बाईक -मकैनिक हो जाए तो वह एक सुपरबाईक बनाएगा जो सड़क पर सबसे तेज़ दौड़ेगी,पानी पर तैरगी और बटन दबाते ही हवा में उड़ने लगेगी |उसने यह बात मकैनिक अंकल को बताई तो उन्होंने उसके सिर पर हाथ फेरा |

रविवार को सारा परिवार मेट्रो-ट्रेन और फिर बैटरी-रिक्शे में बैठकर चिड़ियाघर पहुँचा |ज़ू में  उन्होंने शेर,भालू,जिराफ़.हिरण,बन्दर.मगरमच्छ और ढेर सारे पक्षी देखें |वहाँ उन्होंने पुराने किले की झील में बोट-रेस की और चिड़ियाघर के सुंदर पार्क में बैठ कर लंच किया |पापा ने बूढ़े अंकल के सारे गुब्बारे खरीद लिए |उन्होंने बूढ़ी भिखारिन को खाना खिलाया |चुनमुन को बहुत अच्छा लगा |पापा सबका ध्यान रखते हैं |उसने पापा के गले में झूल कर कहा –आई लव यू पापा |

उसने जोर से कहा -मुझे पापा जैसा बनना है |

और फिर अपने मूंह पर हाथ रख लिया |

सोमेश कुमार(मौलिक एवं अमुद्रित )

 

Views: 764

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय विजय निकोर जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
5 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Wednesday
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
Tuesday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
Tuesday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Apr 11
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Apr 11
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service