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Dear Admin:

I respect OBO's rules regarding the poems/articles to be previously unpublished, and there is a good reason for it. However, with this we, the readers, can be missing out on enjoying some good "reading" as well.

 

Would OBO consider having a separate group or section for including the poems/articles published elsewhere?

 

Regards, and thanks for your consideration.

 

Vijay Nikore

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Replies to This Discussion

आदरणीय विजय जी की बात से सहमत हूं। आखिर पुनः प्रकाशन से परहेज क्यों? यदि किसी की रचना फिर से प्रकाशित करने के योग्य है तो उसे फिर से प्रकाशित करने की अनुमति प्रदान की जानी चाहिए। अलग खण्ड इसके लिए बनाया जाए तो अच्छा ही रहेगा।

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
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Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
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Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
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