For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

धर्मकोट गाँव अब यहाँ के पारम्परिक व्यंजनों का स्थान पिज्जा और पास्ता ने ले लिया है

Views: 259

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 23, 2012 at 10:46pm

आपके हार्दिक दुःख को समझ सकता हूँ, आदरणीय गणेशभाईजी.

हम अस्सी के दशक में पिताजी के साथ सपरिवार काठमाड़ौ (काठमाण्डू शहर का नेपाली भाषा में उच्चारण) गये थे.  अपने निवास के निकट ही कमलादी क्षेत्र में एक परिवार था. परिचय हो गया. पिताजी ने उनसे स्पष्ट रूप से पूछा था कि क्या हम उनके घर में खाना खा सकते हैं. हम जबतक काठमाड़ौ में रहे वे लोग खाना खाने के समय हमें आदर से अपने घर लिवा ले जाते थे. हम उनकी रसोई में पालथी बैठ कर सपरिवार खाना खाते थे. हमारा वह प्रवास हफ़्ते भर से ज्यादा रहा था.  मुझे नहीं लगता कि आज काठमाड़ौ का वह कमलादी क्षेत्र ऐसा रह गया होगा.  वाकई अब सब कुछ ’मार्केटिंग’ की नज़्र हो गया है. और यह ’मार्केटिंग’ हमसे बहुत कुछ छीमती जा रही है.

 

ज्ञातव्य :  कमलादी शहर के ठीक बीचोबीच का मुहल्ला है.

Comment by ganesh lohani on July 23, 2012 at 2:44pm

आदरनीय भाई जी बहुत दुखद: है अब  इस गाँव में घर आंगन के आस पास साग सब्जी की क्यारियां नजर नहीं आती  सिर्फ कंक्रीट का जंगल नजर आता है | यहाँ के कास्तकारों की जमीन पर बंगलों में यहाँ के लोग नौकरी करते है |देसी खाना छोड़ पिज्जा और पास्ता उड़ा रहे हैं| एन लोगों ने अपना पारम्परिक व्यसाय भेड़ पालन तो छोड़ ही दिया साथ ही अपनी संसकिर्ती भी भूल गये है | घर का हर कमरा गेस्ट हाउस में तब्दील हो गया है |इस गाँव में अधिकतर इरानी पर्यटक टहरते हैं | कई दिन होटल के खाने से उबकर सादा खाना का मन हुआ | बड़ी मुस्किल से एक घर में अजीत पठानिया जी तयार हुए | लेकिन शर्त रखी की तुम्हे साथ में हाथ बत्ताना होगा | दाल चावल पालक की भाजी खीरे रायता बनाया |बड़ा आनंद आया | 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 19, 2012 at 3:44pm

भाईजी, इस महाविनाशी सार्वभौमिकता को ’मार्केटिंग’ कहते हैं .. .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"एक सप्ताह के लिए सभी चार आयोजन के द्वार खुल गए। अच्छी बात ये है कि यह एक प्रयोग है ..... लेकिन…"
2 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ++++++++   ठंड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं…"
22 minutes ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सच फ़साना नहीं कि तुझ से कहें ये बहाना नहीं कि तुझ से कहें दिल अभी जाना नहीं कि तुझ से कहें ग़म…"
3 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सादर अभिवादन "
4 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी की नमस्कार, यूँ तो आज आयोजन प्रारंभ ही हुए हैं और किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है,…"
7 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
19 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"स्वागतम"
19 hours ago
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
19 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"स्वागतम"
19 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आपकी बात से सहमत हूँ। यह बात मंच के आरंभिक दौर में भी मैंने रखी थी। अससे सहजता रहती। लेकिन उसमें…"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .विविध

दोहा सप्तक. . . . . . विविधकभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।सुलझेंगे उलझे हुए,  अंतस के हालात…See More
Monday
amita tiwari posted blog posts
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service