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दुष्यन्त कुमार की ग़ज़लों की सुरमयी शाम सम्पन्न- ‘वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ’

भोपाल। ग़ज़ल में नवाचार के प्रणेता दुष्यन्त कुमार की जयन्ती पर दुष्यन्त कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय द्वारा शहर के प्रसिद्ध गायक श्री ज़मीर हुसैन खां एवं कु. तनुसिंह और शिवली डे सरकार द्वारा दुष्यन्त कुमार की ग़ज़लों की सांगीतिक प्रस्तुति हुई।
तबले पर श्री रविराव , सिंथासाईज़र पर श्री सतीश रूडेले एवं सांरगी पर श्री शीराज़ हुसैन खां श्री ज़मीर हुसैन का साथ दे रहे थे।
दुष्यन्त कुमार की सर्वाधिक चर्चित ग़ज़ल ‘कहाँ तो तय था चरागां हरेक घर के लिए, ‘मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ, वो ग़ज़ल आपका सुनाता हूँ’ एवं ‘कहीं पे धूप की चादर बिछाकर’ स्वर श्री ज़मीर हुसैन खां तनु सिंह एवं शिवली द्वारा एक ‘कबूतर चिट्ठी लेकर पहली-पहली बार उड़ा’। दुष्यन्त कुमार की लगभग सात-आठ ग़ज़लों की सांगीतिक प्रस्तुति हुई। ज़मीर हुसैन खां द्वारा प्रस्तुत ग़ज़लों में ‘मरना लगा रहेगा यहां,’ ‘तुमको निहार रहा हूँ’, ‘होने लगी है जुबिश’ आदि ग़ज़लों की प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम में संग्रहालय के संरक्षक श्री पुखराज मारू, श्री मिथलेश वामनकर, श्री रामराव वामनकर श्री महेश सक्सेना, श्री घनश्याम मैथिल अमृत, डाॅ. विमल कुमार शर्मा, श्री अशोक निर्मल सहित संग्रहालय के पदाधिकारी एवं शहर के कलाप्रेमी, साहित्यप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। आयोजन का संचालन निदेशक राजुरकर राज ने और आभार विवेक मृदुल ने व्यक्त किया.

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