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Barkha Shukla
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Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-53 (विषय अधिकार)
"सच्चाई  “क्यों कहाँ है तुम्हारा लाड़ला बेटा ?घर नहीं आया ,दुकान से तो कब का निकल गया । “मनोहर ने घर आकर पत्नी सुषमा से पूछा । “अरे रुक गया होगा दोस्तों के पास ,दिन भर इतनी मेहनत करता है ,थोड़ा घूमना तो बनता है । “सुषमा…"
Aug 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"बहुत - बहुत धन्यवाद आदरणीय प्रतिभा जी ,सादर"
Jul 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"बहुत बढ़िया लघुकथा आदरणीय रचना जी , बधाई आपको ,सादर"
Jul 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"बहुत सुंदर लघुकथा आदरणीय अंजली जी , बधाई आपको ,सादर"
Jul 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"बहुत - बहुत धन्यवाद आदरणीय रचना जी ,सादर "
Jul 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"बहुत -बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय सर ,सादर "
Jul 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"बहुत - बहुत धन्यवाद आदरणीय अंजली जी ,पहले मैंने भी यही सोचा था ,आपकी सलाह पर ध्यान दूँगी ,धन्यवाद ,सादर "
Jul 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"बहुत बढ़िया रचना आदरणीय उस्मानी जी ,बधाई आपको ,सादर "
Jul 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"बहुत सुंदर रचना आदरणीय प्रतिभा जी ,बधाई आपको ,सादर "
Jul 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"बहुत - बहुत धन्यवाद आदरणीय तेज़ वीर जी ,सादर "
Jul 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"इस बेहतरीन रचना के लिए बहुत बधाई आदरणीय तेज़ वीर जी ,सादर "
Jul 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"सुंदर रचना आदरणीय आसिफ़ जी ,बधाई आपको सादर"
Jul 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"बहुत बढ़िया रचना आदरणीय विनय सर ,बधाई आपको इस रचना के लिए  ,सादर "
Jul 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"सुंदर लघुकथा बधाई आपको आदरणीय मोहन जी ,सादर"
Jul 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"बहुत - बहुत धन्यवाद आदरणीय उस्मानी जी ,स्पेस देकर टाइप किया था ,काँपी पेस्ट करने पर ऐसा हो गया ,सादर "
Jul 31
Barkha Shukla replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"आदरणीय सर बहुत - बहुत धन्यवाद , सर स्पेस दे कर टाइप किया था ,काँपी पेस्ट करने पर ऐसा हो गया , सादर"
Jul 31

Profile Information

Gender
Female
City State
Indore (M.P.)
Native Place
Harda (M.P.)
Profession
House Wife
About me
Malti joshi ji ,shivani ji ki kahaniya padhna pasand hai

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Barkha Shukla's Blog

लघुकथा

गुरु की जीत



आज फिर मोहन सर ने क्लास में अनुराग से प्रश्न पूछा था ,उसके जवाब न देने पर वो उसे डाँटने लगे थे ।अनुराग ने डरते हुए कहा ,"सर अभी ये सवाल आपने करवाया नहीं है । "सर ने कहा "चुप चाप खड़े रहो बहस मत करो ।"अनुराग ने अपनी बड़ी २ आँखो से ऐसे देखा ,जैसे पूछ रहा हो आप हमेशा बिना किसी ग़लती के मुझे क्यों डाँटते रहते है । मोहन सर जब इस स्कूल में नये आए थे तो अनुराग की आँखे उन्हें किसी की याद दिला रही थी । उन्होंने उस से उसके पापा का नाम पूछा था । उनका अंदाज़ा सही था वो उनके कॉलेज के… Continue

Posted on July 9, 2017 at 9:09am — 12 Comments

लघु कथा

लघु कथा

खिलते गुलाब



आज बैंक की छुट्टी होने से रोहित घर पर ही था । पड़ोसी वर्मा जी के घर चहल पहल देख कर उसने माँ से पूछा , उन्होंने बताया आज उनकी बेटी का रिश्ता पक्का करने कुछ लोग आ रहे है । ये सुनते ही वो उदास हो गया ,जूही और वो एक दूसरे को शुरू से पसंद करते थे ।

अब जब उसकी नौकरी लग गयी थी तो उसने सोचा था ,माँ को अपनी पसंद बता देगा । जूही भी अपनी माँ को कुछ बता नहीं पायी थी ।वो दिनभर अनमना ही रहा ।

चार बजे तक पड़ोस से आवाज़ें आती रही । फिर सब शांत हो गया । थोड़ी देर… Continue

Posted on June 21, 2017 at 1:13pm — 3 Comments

 
 
 

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"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,बहुत उम्द: रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
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