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Harihar Jha
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Harihar Jha commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"बबिता जी , बहुत बहुत धन्यवाद।"
Sep 30
Harihar Jha commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"बबीता जी , बहुत बहुत धन्यवाद।"
Sep 30
babitagupta commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"बेहतरीन रचना, गुजरे जमाने की और आधुनिक जीवन शैली की तुलना व कटाक्ष करती रचना,हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय हरिहर सरजी। "
Sep 29
Harihar Jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"तमाशा कहें जिसे   आतंक हो, दया में,   वो न्यारा कहें जिसे कौन हैं? बम चले तो, तमाशा कहें जिसे   लूटा, कहा  जो कुछ भी, सहा सब तो माफ था जिन्दगी हो बहाल, तो प्यारा कहें जिसे   जीगर ने, दुख उठाये, बुरा हो इस प्यार का अपना…"
Sep 27
Samar kabeer commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"मुझे भी यही एक कविता नज़र आ रही है आपकी ।"
Sep 26
Harihar Jha commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"आदरणीय समर  कबीर जी, नाम लिखने में पिछली बार भूल हुई क्षमा चाहता हूँ। मुझे  'My Blog' में एक और केवल एक कविता दिख रही है।  क्या आपको इस कविता के अलावा मेरी अन्य चार-पाँच कवितायें दिखती है? मुझे शंका है मेरे ही दो एकाउंट…"
Sep 26
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"आद0हरिहर झा जी सादर अभिवादन। बढ़िया रचना है पर यह दुबारा पोस्ट हुई है। एक बात और आपने "आदरणीय समीर जी" लिखा है अपने प्रतिउत्तर में जबकि सहीह नाम "समर कबीर" है, देखियेगा।"
Sep 25
Samar kabeer commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"इसका जवाब तो प्रबन्धन समिति ही देगी,आदरणीय ।"
Sep 25
Harihar Jha commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"आदरणीय समीर जी, नमस्कार। मुझे केवल एक बार ही दिख रही है। दो बार दिखने पर संपादन मंडल को एक हटा देने का पूरा अधिकार है। एक बात मेरी समझ में नहीं आई कि फोरम के लिये कविता केवल ब्लोग (My Blog) पर लगानी है या फोरम के कमेंट में भी। कुछ दिनो पहले मेरी…"
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Samar kabeer commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"जनाब हरिहर झा साहिब आदाब,ये रचना आपने दोबारा पोस्ट कर दी है,देखियेगा ।"
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Harihar Jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"अभी मुझे छंद में लिखने का अभ्यास नहीं है। क्योंकि इसमें मात्रीक छन्द के नवगीत का प्रावधान  भी देखा तो उसका उपयोग करना उचित समझा।  इसकी  प्रत्येक पंक्ति २३ मात्राओं से बनती है तथा नवगीत के नियम  इस पर लागू किये हैं। "
Sep 22
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Sep 22
Harihar Jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुन्दर कविता!   छोटेलाल जी! छन्दबद्ध!"
Sep 22
Harihar Jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुन्दर कविता लिखी है अनीता जी!"
Sep 22
Harihar Jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"(नवगीत) लाल मेरा, अधर में, टंगा सपन खोले  हाय ! पीड़ित, है  भले पर दर्द क्या बोले कंस ने उस,  पार किये बहुत अत्याचार तुम कहाँ के, बने तीरंदाज हो भोले !   देख टी वी, बाढ़ से,  मदद में  डूबोगे?   बचाने…"
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Harihar Jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह! गंगाधर जी! आपकी छन्दबद्ध कविता जबर्दस्त है। एक तरफ कविता के रस से भाव-विभोर करती है तो साथ ही पीड़िता के दुख से शोकाकुल भी कर देती है। इस रचना के लिये आपको बधाई!"
Sep 22

Profile Information

Gender
Male
City State
Melbourne
Native Place
Banswara
Profession
Ret.

Harihar Jha's Blog

अच्छे दिन थे

चंदा से गपियाने के दिन

कहाँ कठिन थे

राजनीतिको छोड़ो     

कैसे अच्छे दिन थे।

 

टीलों पर,

रथ ले अपना 

भाग निकलते थे,

अब विमान में डर है 

नौ ग्यारह फिर आये; 

घसीटते जीवन को,

बोर हुई यात्रायें,

जेटलेग के मारे 

नींद रुष्ट हो जाये;

 

इंटरनेट बिना भी 

न थी झंझट कहीं भी 

सभी खुले में होते 

जश्न,  कहाँ केबिन…

Continue

Posted on September 21, 2018 at 1:30pm — 8 Comments

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