For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Harihar Jha
Share

Harihar Jha's Groups

 

Harihar Jha's Page

Latest Activity

Harihar Jha commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"बबिता जी , बहुत बहुत धन्यवाद।"
Sep 30
Harihar Jha commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"बबीता जी , बहुत बहुत धन्यवाद।"
Sep 30
babitagupta commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"बेहतरीन रचना, गुजरे जमाने की और आधुनिक जीवन शैली की तुलना व कटाक्ष करती रचना,हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय हरिहर सरजी। "
Sep 29
Harihar Jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"तमाशा कहें जिसे   आतंक हो, दया में,   वो न्यारा कहें जिसे कौन हैं? बम चले तो, तमाशा कहें जिसे   लूटा, कहा  जो कुछ भी, सहा सब तो माफ था जिन्दगी हो बहाल, तो प्यारा कहें जिसे   जीगर ने, दुख उठाये, बुरा हो इस प्यार का अपना…"
Sep 27
Samar kabeer commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"मुझे भी यही एक कविता नज़र आ रही है आपकी ।"
Sep 26
Harihar Jha commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"आदरणीय समर  कबीर जी, नाम लिखने में पिछली बार भूल हुई क्षमा चाहता हूँ। मुझे  'My Blog' में एक और केवल एक कविता दिख रही है।  क्या आपको इस कविता के अलावा मेरी अन्य चार-पाँच कवितायें दिखती है? मुझे शंका है मेरे ही दो एकाउंट…"
Sep 26
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"आद0हरिहर झा जी सादर अभिवादन। बढ़िया रचना है पर यह दुबारा पोस्ट हुई है। एक बात और आपने "आदरणीय समीर जी" लिखा है अपने प्रतिउत्तर में जबकि सहीह नाम "समर कबीर" है, देखियेगा।"
Sep 25
Samar kabeer commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"इसका जवाब तो प्रबन्धन समिति ही देगी,आदरणीय ।"
Sep 25
Harihar Jha commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"आदरणीय समीर जी, नमस्कार। मुझे केवल एक बार ही दिख रही है। दो बार दिखने पर संपादन मंडल को एक हटा देने का पूरा अधिकार है। एक बात मेरी समझ में नहीं आई कि फोरम के लिये कविता केवल ब्लोग (My Blog) पर लगानी है या फोरम के कमेंट में भी। कुछ दिनो पहले मेरी…"
Sep 25
Samar kabeer commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"जनाब हरिहर झा साहिब आदाब,ये रचना आपने दोबारा पोस्ट कर दी है,देखियेगा ।"
Sep 24
Harihar Jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"अभी मुझे छंद में लिखने का अभ्यास नहीं है। क्योंकि इसमें मात्रीक छन्द के नवगीत का प्रावधान  भी देखा तो उसका उपयोग करना उचित समझा।  इसकी  प्रत्येक पंक्ति २३ मात्राओं से बनती है तथा नवगीत के नियम  इस पर लागू किये हैं। "
Sep 22
Harihar Jha posted blog posts
Sep 22
Harihar Jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुन्दर कविता!   छोटेलाल जी! छन्दबद्ध!"
Sep 22
Harihar Jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुन्दर कविता लिखी है अनीता जी!"
Sep 22
Harihar Jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"(नवगीत) लाल मेरा, अधर में, टंगा सपन खोले  हाय ! पीड़ित, है  भले पर दर्द क्या बोले कंस ने उस,  पार किये बहुत अत्याचार तुम कहाँ के, बने तीरंदाज हो भोले !   देख टी वी, बाढ़ से,  मदद में  डूबोगे?   बचाने…"
Sep 22
Harihar Jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह! गंगाधर जी! आपकी छन्दबद्ध कविता जबर्दस्त है। एक तरफ कविता के रस से भाव-विभोर करती है तो साथ ही पीड़िता के दुख से शोकाकुल भी कर देती है। इस रचना के लिये आपको बधाई!"
Sep 22

Profile Information

Gender
Male
City State
Melbourne
Native Place
Banswara
Profession
Ret.

Harihar Jha's Blog

अच्छे दिन थे

चंदा से गपियाने के दिन

कहाँ कठिन थे

राजनीतिको छोड़ो     

कैसे अच्छे दिन थे।

 

टीलों पर,

रथ ले अपना 

भाग निकलते थे,

अब विमान में डर है 

नौ ग्यारह फिर आये; 

घसीटते जीवन को,

बोर हुई यात्रायें,

जेटलेग के मारे 

नींद रुष्ट हो जाये;

 

इंटरनेट बिना भी 

न थी झंझट कहीं भी 

सभी खुले में होते 

जश्न,  कहाँ केबिन…

Continue

Posted on September 21, 2018 at 1:30pm — 8 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:56am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  PHOOL SINGH जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  narendrasinh chauhan जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  Samar kabeerजी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  राज़ नवादवीजी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं जीवन पर :
"आदरणीय फूल सिंह जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पागल मन ..... (400 वीं कृति )
"आदरणीय  PHOOL SINGHजी सृजन पर आपकी मधुर प्रशंसा का आभारी है।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , प्रस्तुति को आत्मीय मान देने एवं सुधारात्मक सुझाव देने का दिल से…"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आदरणीय  narendrasinh chauhanजी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आदरणीय फूल सिंह जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post देर तक ....
"आदरणीय narendrasinh chauhanजी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service