For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

anamika ghatak
  • Female
  • noida
  • India
Share

Anamika ghatak's Friends

  • Bhawesh Rajpal
  • CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU'
  • AjAy Kumar Bohat
  • आशीष यादव
 

anamika ghatak's Page

Latest Activity

Dr Ashutosh Mishra commented on anamika ghatak's blog post सब कहते हैं...
"आदरणीया अनामिका जी इस मंच पर आपका हार्दिक स्वागत करता हूँ आदरणीय आरिफ जी की बातो का संज्ञान लें ...सादर "
Nov 13
SALIM RAZA REWA commented on anamika ghatak's blog post सब कहते हैं...
"मोहतरमा अनामिका जी, सुंदर प्रयास के लिए बधाई,"
Nov 13
Dr Ashutosh Mishra commented on anamika ghatak's blog post सब कहते हैं...
"आदरणीया अनामिका जी इस मंच पर आपका हार्दिक स्वागत करता हूँ आदरणीय आरिफ जी की बातो का संज्ञान लें ...सादर "
Nov 13
Samar kabeer commented on anamika ghatak's blog post सब कहते हैं...
"मोहतरमा अनामिका जी आदाब,शायद आपने ग़ज़ल लिखने का प्रयास किया है,लेकिन अभी आपको ग़ज़ल विधा के बारे में बहुत अध्यन करना होगा,इसके लिए इस मंच पर ग़ज़ल की कक्षा का लाभ उठायें । इस प्रयास पर बधाई आपको ।"
Nov 13
anamika ghatak commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तालिका छंद
"बेहतरीन तालिका छंद ...वाह "
Nov 12
anamika ghatak commented on SALIM RAZA REWA's blog post किसी भी ज़ुल्म गुनाह-ओ- ख़ता से डरते हैं - सलीम रज़ा रीवा ( ग़ज़ल )
"ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए "
Nov 12
Mohammed Arif commented on anamika ghatak's blog post सब कहते हैं...
"आदरणीया अनामिका जी आदाब, ओबीओ मंच पर मैं आपकी यह पहली रचना से संवाद कर रहा हूँ । सबसे पहले आपका हार्दिक अभिनंदन । आपकी उक्त रचना किस विधान के अंतर्गत आती है यह आपने ऊपर दर्शाया नहीं है । इस मंच का नियम है कि रचना के साथ उसका विधान भी लिखना अनिवार्य…"
Nov 12
anamika ghatak posted a blog post

सब कहते हैं...

सब कहते हैं शहर में भी सहर होता हैपर शहर में बसर कहाँ बशर होता हैदूर दूर जहाँ तक नज़र जाती हैधुँआ धुँआ शहर ये ज़हर ढोता हैदाग़ ग़ालिब का ये जो पुराना शहर हैबात बात में गालियों का हर्जाना भरे हैक्या हो गया है इस नए ज़माना ए नस्ल कोरिश्तों को सरेआम सरेबाज़ार करे हैंशब ओ सहर ए उजाला ए फ़सानाशहर ए ग़म की कहानी कहे हैक्या कहूँ अब किस्सा ज़िंदगी कासब अपनी अपनी कहानी कहे हैं"मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
Nov 12
anamika ghatak commented on Devendra Pandey's blog post मुक्तक
" बेहद उम्दा व लाजवाब"
Nov 10
Sanjay Rajendraprasad Yadav left a comment for anamika ghatak
""बहुत सुन्दर, विरह के शर्द- दर्द है इसमे.... अनामिका जी बधाई आपको............!!!!  "
Aug 22, 2012
anamika ghatak updated their profile
Aug 19, 2012
anamika ghatak and Bhawesh Rajpal are now friends
Aug 19, 2012
anamika ghatak commented on राजेश 'मृदु''s blog post कवि तेरे भी
"बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति"
Aug 19, 2012
anamika ghatak liked राजेश 'मृदु''s blog post कवि तेरे भी
Aug 19, 2012
anamika ghatak commented on anamika ghatak's blog post तृष्णा
"ap sab guni jano ka tahe dil se dhanyawad"
Jun 15, 2012
Albela Khatri commented on anamika ghatak's blog post तृष्णा
"बहुत अच्छी  कविता ....... बधाई अनामिका जी !"
Jun 15, 2012

Profile Information

Gender
Female
City State
noida
Native Place
noida
Profession
service
About me
kavitao ke madhyam se bhawnao ko vykta karne ki koshish

Anamika ghatak's Blog

सब कहते हैं...

सब कहते हैं शहर में भी सहर होता है
पर शहर में बसर कहाँ बशर होता है

दूर दूर जहाँ तक नज़र जाती है
धुँआ धुँआ शहर ये ज़हर ढोता है

दाग़ ग़ालिब का ये जो पुराना शहर है
बात बात में गालियों का हर्जाना भरे है

क्या हो गया है इस नए ज़माना ए नस्ल को
रिश्तों को सरेआम सरेबाज़ार करे हैं

शब ओ सहर ए उजाला ए फ़साना
शहर ए ग़म की कहानी कहे है

क्या कहूँ अब किस्सा ज़िंदगी का
सब अपनी अपनी कहानी कहे हैं

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

Posted on November 11, 2017 at 11:04am — 5 Comments

तृष्णा

इन बारिश की बूंदों को
तन से लिपटने दो
प्यासे इस चातक का
अंतर्मन तरने दो
बरसो की चाहत है
बादल में ढल जाऊं
पर आब-ओ-हवा के
फितरत को समझने दो
फिर भी गर बूंदों से
चाहत न भर पाए
मन की इस तृष्णा को
बादल से भरने दो

Posted on June 14, 2012 at 8:00pm — 4 Comments

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:48am on August 22, 2012, Sanjay Rajendraprasad Yadav said…
"बहुत सुन्दर, विरह के शर्द- दर्द है इसमे.... अनामिका जी बधाई आपको............!!!!  
At 9:06pm on January 3, 2012, Admin said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted a photo
43 minutes ago
Manoj kumar shrivastava posted blog posts
1 hour ago
SALIM RAZA REWA posted a blog post

तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा

212 1222 212  1222तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैंरात - रात भर तेरा इंतज़ार करते हैंतुमको…See More
1 hour ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post खामोश आखें
"उत्साह वर्धन हेतु आपका कोटिशः आभार आदरणीय शेख अहमद जी"
2 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है

1222 1222 122तपन को आजमाना चाहता है ।समंदर सूख जाना चाहता है ।।तमन्ना वस्ल की लेकर फिजा में।कोई…See More
11 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -राजाधिराज का गिरा’ दुर्जय कमान है-कालीपद 'प्रसाद'
"बढ़िया पेशकश के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब कालीप्रसाद मण्डल जी।"
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मज़ाहिया ग़ज़ल
"वाह। यह भी ख़ूब रही! बढ़िया मज़ाहिया ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब सुरेन्द्र…"
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on rajesh kumari's blog post आइना जब क़ुबूल कहता है (ग़ज़ल 'राज')
"शब्द-चित्रों में जीवन-दर्शन और अनुभव पिरोती बेहतरीन ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद…"
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " शायरी "
"जज़्बात बयां करती दिलचस्प ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब पंकजोम…"
12 hours ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -राजाधिराज का गिरा’ दुर्जय कमान है-कालीपद 'प्रसाद'
"आ सुरेन्द्र कुमार शुक्ल जी , सराहना के लिए हार्दिक आभार | सादर नमन "
13 hours ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -राजाधिराज का गिरा’ दुर्जय कमान है-कालीपद 'प्रसाद'
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया | सादर नमन "
13 hours ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -राजाधिराज का गिरा’ दुर्जय कमान है-कालीपद 'प्रसाद'
"आ मोहम्मद आरिफ साहिब आदाब, हौसला अफजाई के लिए हार्दिक आभार |सादर नमन "
13 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service