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shahid mirza shahid
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Shahid mirza shahid's Blog

जो जितना झुका, उतना उठा अपने वतन में

हर रुख से चली यूं तो हवा अपने वतन में

सावन कभी पतझड़ न बना अपने वतन में

 

साज़िश तो बहुत रचते रहे अम्न के दुश्मन...

रिश्तों पे रही महरे-खुदा अपने वतन में

 

हर हीर के दिल में है बसी झांसी की रानी

हर रांझे में बिस्मिल है छिपा अपने वतन में

 …

Continue

Posted on January 26, 2011 at 4:30am — 7 Comments

ग़ज़ल

साहेबान, मुहब्बत भी ज़िन्दगी का एक खूबसूरत पहलू है. पेश है इसी रंग की एक  ग़ज़ल....


अजायबघरों में सजाएं मुहब्बत

कहीं से चलो ढूंढ लाएं मुहब्बत



तराना दिलों का बनाएं मुहब्बत

चलो साथ में गुनगुनाएं मुहब्बत…



Continue

Posted on January 23, 2011 at 7:00pm — 8 Comments

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At 6:34pm on January 24, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…
At 11:35pm on January 23, 2011,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…

आदरणीय शाहिद मिर्जा साहब

OBO परिवार में आपका स्वागत है|

At 11:33pm on January 23, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 6:53pm on January 23, 2011, Admin said…
 
 
 

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