For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जो जितना झुका, उतना उठा अपने वतन में

हर रुख से चली यूं तो हवा अपने वतन में

सावन कभी पतझड़ न बना अपने वतन में

 

साज़िश तो बहुत रचते रहे अम्न के दुश्मन...

रिश्तों पे रही महरे-खुदा अपने वतन में

 

हर हीर के दिल में है बसी झांसी की रानी

हर रांझे में बिस्मिल है छिपा अपने वतन में

 

तहज़ीब का हिस्सा है यहां सादा मिज़ाजी

जो जितना झुका, उतना उठा अपने वतन में

 

मिटती नहीं मिट्टी से ये उल्फ़त कभी शाहिद

होने को तो क्या कुछ न हुआ अपने वतन में

                  शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

जज़्बात جذبات Jazbaat

Views: 568

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Veerendra Jain on January 28, 2011 at 11:22am

तहज़ीब का हिस्सा है यहां सादा मिज़ाजी

जो जितना झुका, उतना उठा अपने वतन में

 

waah shahid bhai ....kya baat kahi hai aapne...bahut umda...

Comment by वीनस केसरी on January 28, 2011 at 1:54am

रदीफ को क्या ही खूबसूरत ढंग से निभाया है कि हर शेर को चार चाँद लग गए 

 

हार्दिक बधाई 

Comment by Lata R.Ojha on January 26, 2011 at 7:51pm

हर हीर के दिल में है बसी झांसी की रानी

हर रांझे में बिस्मिल है छिपा अपने वतन में

 

Sach hai ..dabey jazbaaton ko waqt hi ubhaarta hai..deshbhakti to lahoo ban ke bahti hai ragon mein..:)

bahut hi sundar bhaav ..

Comment by Abhinav Arun on January 26, 2011 at 6:44pm

हर हीर के दिल में है बसी झांसी की रानी

हर रांझे में बिस्मिल है छिपा अपने वतन में

बहुत ही बढ़िया रचना बधाई !!!

Comment by Dinesh Kumar on January 26, 2011 at 11:49am

हर हीर के दिल में है बसी झांसी की रानी

हर रांझे में बिस्मिल है छिपा अपने वतन में

 bahut khoob. yah mulk aisa hi hai kan kan me raam aur rahim baste hai yaha par.

मिटती नहीं मिट्टी से ये उल्फ़त कभी शाहिद

होने को तो क्या कुछ न हुआ अपने वतन में

bahut umda shayari. Mohammad Iqabal ki jhalak hai apaki shayari me. Happy republic day

Comment by Sanjay Kumar Singh on January 26, 2011 at 10:56am
achchi Gazal likhi hai aapney , Happy Republic Day

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 26, 2011 at 9:36am

हर हीर के दिल में है बसी झांसी की रानी

हर रांझे में बिस्मिल है छिपा अपने वतन में,

वाह वाह शाहिद साहब , जज्बातों को शब्द देते हुए यह शे'र बेहद खुबसूरत है , अच्छी ग़ज़ल हेतु बधाई, गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामना |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Jul 5
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service