For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

vijay
Share on Facebook MySpace
 

vijay's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
delhi
Native Place
Delhi
Profession
security system dealer

Vijay's Blog

मुस्कुराते हो बहुत पछताओगे

मुस्कुराते हो बहुत पछताओगे
बज़्म से तुम भी निकाले जाओगे


तुम विसाले यार को बेताब हो
उस से मिल कर भी बहुत पछताओगे


साथ तेरा मिलगया मगरूर हूँ
तुम भला क्यों गीत मेरे गाओगे


रूह को माँ बाप की तस्लीम कर
साथ अपने सब उजाले पाओगे


भूख से बच्चा बिलखता हो अगर
किस तरहा से रोटियां खा पाओगे


बात सच्ची कह रहे हो तुम मनु
इस जुबा पर तुम भी छाले पाओगे
.
मौलिक एवं अप्रकाशित
विजय कुमार मनु

Posted on February 1, 2015 at 8:00am — 7 Comments

माँ तू सुनती क्यों नहीं

माँ तू सुनती क्यों नहीं

तूँ बुनती क्यों नहीं

इक नई सी जिंदगी

वो घुटनों पे चलना

वो आँखों को मलना

वो मिटटी को खाना

बिना सुर के गाना

वो चिल्ला के कहना

मुझे रोटी देना

आज फिर चूल्हे पे पानी

तूँ पकाती क्यों नहीं

माँ तूँ सुनती क्यूँ नहीं

वो तेरी हथेली

में कितनी पहेली

वो मेरा कसकना

वो तेरा सिसकना

वो ममता की छाया

मुझे याद आया

वो मुस्कान तेरी

वो पेशानी मेरी

आज फिर से बोशा

सजाती क्यूँ नहीं

माँ…

Continue

Posted on January 30, 2015 at 7:30pm — 12 Comments

जिंदगी

हाथ से यूँ सरसराती सी निकाली जिंदगी
खूब कोशिश की मगर कैसे संभाली जिंदगी


लाख पटके पांव फिर भी जो लिखा था वो हुआ
हर तजुर्बे कर के देखे और खंगाली जिंदगी


जिंदगी की राह में चलते हुए ऐसा लगा
है मरासिम कुछ पुराना देखी भाली जिंदगी


है बड़ी बेबाक सी उज्जड गवारों सी लगी
अब मुझे कितना कचोटे एक गाली जिंदगी

.
मौलिक एवं अप्रकाशित
विजय कुमार मनु

Posted on January 28, 2015 at 9:30am — 11 Comments

एक ग़ज़ल

जिंदगी रेत की मानिंद सरक जाती है

ये मेरी जीस्त हरेक गाम लरज जाती है

तू खफा है तो हुआ कर या रब

सामने मेरे फकत माँ ही काम आती है

ये हुस्न ये शबाब ये नामो शौकत

तूँ बता बाद में मरने के किधर जाती है

मेरी किस्मत है जैसे आंधियो में रेत के घर

जब चमकती है सरे राह बिखर जाती है

यूँ हुआ बेवफा मुझी से जहाँ

याद करता हूँ वफ़ा आँख बरस जाती है

अब मेरा दिल है मेरी जां है और बस मैं हूँ

उसको देखूं कभी ये रूह तरस जाती है

अब तो घर चल बहुत ही रात हुई अब तो… Continue

Posted on January 26, 2015 at 10:53pm — 12 Comments

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:51pm on January 26, 2015, vijay said…
जिंदगी रेत की मानिंद सरक जाती है
ये मेरी जीस्त हरेक गाम लरज जाती है
तू खफा है तो हुआ कर या रब
सामने मेरे फकत माँ ही काम आती है
ये हुस्न ये शबाब ये नामो शौकत
तूँ बता बाद में मरने के किधर जाती है
मेरी किस्मत है जैसे आंधियो में रेत के घर
जब चमकती है सरे राह बिखर जाती है
यूँ हुआ बेवफा मुझी से जहाँ
याद करता हूँ वफ़ा आँख बरस जाती है
अब मेरा दिल है मेरी जां है और बस मैं हूँ
उसको देखूं कभी ये रूह तरस जाती है
अब तो घर चल बहुत ही रात हुई अब तो मनुु
दूर होता हूँ तभी घर की भी याद आती है
मौलिक एवम अप्रकाशित
विजय कुमार "मनु"
At 10:04am on January 10, 2015, vijay said…
जान न ले मेरी आँखों से मेरे मन की बात कोई
सो मई आँखे बंद किये बैठा रहता हूँ रातों में
मेरी बातें सुन कर के अंदाज बदल ही जाये ना
सो मैं हँस कर टाल रहा अंदाज बदलकर बातों में
जब भी मिलना दूरी रखना सारी दुनियादारी से
शहर का हर इक शख्श मिलेगा लेकर खंजर हाथो में
एक सी धड़कन तेरे दिल में एक जवाँ दिल मुझमे भी
आ कर ले कुछ प्यार की बातें क्या रक्खा है घातों में
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service