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ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi)'s Blog (6)

कू-ब-कू शौक़ लिए फिरता है मुझको गुलशन

पत्थरों का रुख़-ए-हस्ती पे गुमाँ होता है l

जब कोई शोला-ए-एहसास धुआँ होता है ll



जिसको इस राह में अहसास जियाँ होता है l

जज्ब-ए-इशक़ वो मकबूल कहाँ होता है ll



आंसुओ में कभी चेहरे की उदासी में कभी l

दर्द जब हद से गुज़रता है अयाँ होता है ll



खून-ए-मजलूम जो होता है ज़मी पर कोई l

मुझ से हस्सास की आँखों से रवाँ होता है…
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Added by ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) on November 12, 2012 at 6:49pm — 1 Comment

दुश्मनी से डर कैसा दोस्ती से डरते हैं

दुश्मनी से डर कैसा दोस्ती से डरते हैं..

खाये हैं फ़रेब इतने हर ख़ुशी से डरते हैं..



जब से आशियाँ अपना जल गया गुलिस्ताँ में..

हो कहीं उजाला हम रौशनी से डरते हैं..



हम तो धूप के राही साथ-साथ सूरज है..

जिस्म जिनके नाज़ुक हैं चाँदनी से डरते हैं..



कुछ न कुछ तो होगा ही इसलिए जहां वाले..

आदमी की सूरत में आदमी से डरते…

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Added by ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) on June 11, 2012 at 9:30pm — 9 Comments

दूसरों का सहारा, सहारा नही

जिंदगी का सफ़र किसको प्यारा नहीं

मौत आये किसी को गवारा नहीं



कर भलाई जो काम आएगी हर तरह

जिंदगी फिर मिलेगी दोबारा नहीं



किस तरह फिर भला मेहरबान हो कोई

तुमने दिल से उसे जब पुकारा नहीं



सूनी-सूनी हैं कश्मीर की वादियाँ

झील में अब कोई भी शिकारा नहीं



जो पहाड़ों से उतरी है गंगोजमन

लौट जाए कोई ऐसी धारा नही



खुद ही अपना सहारा बनो तो बनो

दूसरों का सहारा, सहारा नही



कैसी उलझन है…

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Added by ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) on May 21, 2012 at 11:30pm — 8 Comments

दौरे जाम

जब कभी दौरे जाम होता है
सब यहाँ इंतजाम होता है

सच ही कहता हूँ मेरे साकी के
दोनों हाथों में जाम होता है

और मै उस जगह नही पीता
जिस जगह एहतराम होता है

उसके बच्चों का बस ख़ुदा जाने
किस तरह इंतजाम होता है

डूब कर जब ग़ज़ल कहे शायर
उसका पुख्ता कलाम होता है

शायरी दिल को छू गई जिसकी
उसका महफ़िल में नाम होता है

किस से शिकवा करूँ मैं फिर "गुलशन"
हर तरह मेरा काम होता है

Added by ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) on May 18, 2012 at 10:00pm — 9 Comments

"गुलशन" बात हमारी रखना..

मश्के सुखन को जारी रखना..
"गुलशन" बात हमारी रखना..

फूल अगर हैं महकाने तो..
गोड़ के अपनी क्यारी रखना...

शोला सिफत हो लफ्ज़ तुम्हारे..
फ़िक्र में वो चिंगारी रखना....

फन की कीमत यूँ न मिलेगी..
गजलों को मेंआरी रखना ....

इल्म अगर हासिल करना है...
मेहनत पयहम जारी रखना..

उर्दू की तो शान यही है..
ख़ुश्बू प्यारी-प्यारी रखना..

हम तो हैं आज़ार ग़ज़ल के..
तुम भी ये बीमारी रखना...

Added by ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) on May 15, 2012 at 8:08pm — 21 Comments

ग़रीब माँ ने दुल्हन की तरफ नही देखा ..

किसी ने उसकी फबन की तरफ नही देखा ..

ग़रीब माँ ने दुल्हन की तरफ नही देखा ..



बियाह देता है अपनी ग़रीब बेटी को ..

सखी के चाल-चलन की तरफ नही देखा ..



जला के ख़ाक किया है जभी तो बिजली ने ..

किसी भी रोज़ चमन की तरफ नही देखा ..



वही बुज़ुर्ग ज़माने में आज रौशन हैं ..

जिन्होंने अपने बदन की तरफ नही देखा ..



उसी के नाम पे लिखा गया है ये इतिहास ..

वो जिसने अपने वतन की तरफ नही देखा ..



कुली - क़ुतुब से चली आई लखनऊ उर्दू ..…

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Added by ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) on May 12, 2012 at 7:00pm — 11 Comments

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