ग़ज़ल 2122 1212 22
वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है
कितने दुःख दर्द से भरा दिल है
ये मेरा क्यूँ हुआ है ज़ज़्बाती
पास उनके जो सुनहरा दिल है
ताज इक सब के मन के अंदर भी
और ये शह्र आगरा दिल है
दिल लगी दिल्लगी नहीं होती
इक ग़ज़ब का मुहावरा दिल है
देखकर उनकी मदभरी आँखें
खो गया मेरा मदभरा दिल है
याद मुद्दत से वो नहीं है 'जय'
आज फिर क्यूँ भरा भरा दिल है
मौलिक एवं…
ContinueAdded by Jaihind Raipuri on March 4, 2026 at 10:00pm — No Comments
2122 1212 22
आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में
क्या से क्या हो गए महब्बत में
मैं ख़यालों में आ गया उस की
हो इज़ाफ़ा कहीं न दिक़्क़त में
मुझ से मुझ ही को दूर करने को
आयी तन्हाई शब ए फुर्क़त में
तुम ख़यालों में आ जाते हो यूं
चीन ज्यूँ आ गया तिब्बत में
चाट कर के अफीम मज़हब की
मरते हैं क्यूँ ग़रीब ग़फ़लत में
ए ग़रीबी है शुक्रिया तेरा
जो भी सीखा है सीखा ग़ुर्बत…
ContinueAdded by Jaihind Raipuri on February 3, 2026 at 10:30am — 7 Comments
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