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कुछ कहते कहते रुक जाते हैं,

चंचल, मदभरे, नयन तुम्हारे...

पल - पल देखो डूब रहे हम,

झील से गहरे नयन तुम्हारे....

 

मूक आमंत्रण तुमने दिया था,

अधरों से कुछ भी कहा नहीं,

मुझको अपने रंग में रंग गए,

हाथों से पर छुआ नहीं,

नैनो से सब बातें हो गयीं,

रह गए लब खामोश तुम्हारे....

 

स्पर्श तुम्हारा याद है मुझको,

सदियों में भी भूली नहीं,

कोई ऐसा दिन नहीं जब,

यादों में तेरी झूली नहीं,

बिन परिचय ही बन बैठे,

दिल के तुम मेहमान हमारे....

 

 

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Comment

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Comment by Anita Maurya on July 15, 2011 at 7:29pm
शुक्रिया शशि मेहरा जी..
Comment by Shashi Mehra on July 14, 2011 at 10:10am
किसी के शोर-ए-दिल को  खुबसूरत ब्यान किया है |
बहुत ही अच्छी है | 

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