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कल आँखे खोली दुनिया में
कल को रुखसत हो जाएंगे
संग चले जो कह कर अपना
सब बेगाने हो जाएंगे
साथ तुम्हारा भी ना होगा
वादे सारे खो जाएंगे
दिल में दी थी जगह जिन्होने
क्या फिर बांहे फैलाएंगे?
हाँ, पर जिनको दी मुस्कानें
भुल नहीं हमको पाएंगे
रह ना सकेंगे इस दुनिया में
यादों में हम रह जाएंगे।।

"रिचा भारती"

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Comment by satish mapatpuri on July 28, 2010 at 3:50pm
साथ तुम्हारा भी ना होगा
वादे सारे खो जाएंगे
दिल में दी थी जगह जिन्होने
क्या फिर बांहे फैलाएंगे?
हाँ, पर जिनको दी मुस्कानें
भुल नहीं हमको पाएंगे
रह ना सकेंगे इस दुनिया में
यादों में हम रह जाएंगे।।
बहुत ही अच्छी रचना है, धन्यवाद राजू जी, जिंदगी इसी का नाम है
Comment by Raju on July 26, 2010 at 7:10am
Pranaam Ganesh bhaiya..........

Dhanywaad to Richa Bharti jee ko dijiye jinhone ye kavita likha hai

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 25, 2010 at 8:19pm
कल आँखे खोली दुनिया में
कल को रुखसत हो जाएंगे
संग चले जो कह कर अपना
सब बेगाने हो जाएंगे,
यही जीवन का सत्य है राजू भाई , अच्छी रचना , धन्यवाद,

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