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""सफलता का दर्पण""

करो जीवन मे जो प्रण,
पुरा करने को उसे,
कर दो तन-मन सब कुछ अर्पण।


राह मे आए चाहे कितनी भी कठिनाइयां,
चाहे हँसती रहे तुमपर सारी दुनिया,
अगर पक्का है तुम्हारा इरादा,
तोड़ सकते हो तुम हर बाधा,
सदा रखो स्वयं पर नियंञण,
अस्वीकार कर दो लोभ का हर निमंञण,
ज्यों-ज्यों लक्ष्य के प्रति बढेगा आर्कषण,
चिड़िया की तरह तिनका तिनका उठाना होगा,
तुम्हे रात-दिन अपना पसीना बहाना होगा,

हिम्मत मेहनत और लगन से
पुर्ण किया जो तुमने प्रण
सारा जहां बना लेगा , तुम्हारे राहो को
""सफलता का दर्पण""

Views: 592

Comment

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Comment by BIJAY PATHAK on June 22, 2010 at 4:25pm
Raju,
Bahut hi ucha darza ke kavita likhle bani , Badhai.
asahi likhat rahi
Comment by Babita Gupta on June 20, 2010 at 2:52pm
Aap badhiya likhtey ho raju jee, yey kavita bhi achhi hai, Good,

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 20, 2010 at 11:30am
हिम्मत मेहनत और लगन से
पुर्ण किया जो तुमने प्रण
सारा जहां बना लेगा ,
तुम्हारे राहो को "सफलता का दर्पण"

राजू भाई, बहुत खूब, अच्छी रचना लेकर आये है, अगर आप की कविता से सिख ली जाय तो कोई मंज़िल दूर नही है, जबरदस्त अभिव्यक्ति, धन्यवाद,

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on June 19, 2010 at 2:55pm
राजू भाई, बहुत अच्छा सन्देश देती है आपकी कविता ! अपने बिलकुल सही कहा है :
//चिड़िया की तरह तिनका तिनका उठाना होगा,
तुम्हे रात-दिन अपना पसीना बहाना होगा,//
Comment by Admin on June 19, 2010 at 1:41pm
राजू जी , आज आपने सफलता का राज ओपन बुक्स ऑनलाइन पर आखिर ओपन कर ही दिया , बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति है, वास्तव मे आपकी कविता मे सफलता का दर्पण दिख रहा है, अच्छा प्रयास और अगले रचना का इन्तजार है,धन्यवाद,

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