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एक लड़की को याद करता हूँ !!

शहर के किसी कालेज की

एक लड़की को याद करता हूँ !
सारे काम उसकी तस्वीर
देखने के बाद करता हूँ !

लाइब्रेरी,स्टैंड,कैन्टीन,कैम्पस में
जब वो न दिखे
थक जाऊँ सीढियाँ चढ़ते-उतरते मगर
जब वो न दिखे
तो निराश होकर 
क्लास में पिछली बेंच पे बैठ
उसके आने की मुराद करता हूँ,
शहर के किसी कालेज की
एक लड़की को याद करता हूँ !!

क्लास में बैठकर
फेल पास की माया से दूर
मुहब्बत की जिम्मेदारी
निभाता हूँ मै
वो कहीं भी हो
उसे देखने के लिए
अपनी आँखों को
हर सम्भव कोणों पर
घुमाता हूँ मै
और उसकी एक हँसी से अपनी 
सारी बर्बादियों को आबाद करता हूँ,
शहर के किसी कालेज की
एक लड़की को याद करता हूँ !!

फेसबुक से उसकी तस्वीर का एक पैकर लाता हूँ
अपनी मोबाइल में वही वालपेपर लगाता हूँ
और रात के अँधेरे में जब
पूरा मुहल्ला सोता है
मकानों से पंखों की सरसराहट के सिवा
और कोई खलबली नही होती
तो शमां जलाकर उस लड़की की
शायरी का ढंग इजाद करता हूँ,
शहर के किसी कालेज की
एक लड़की को याद करता हूँ !!
________________

Views: 546

Comment

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Comment by Rohit Dubey "योद्धा " on July 31, 2011 at 5:15pm

meri jindagi ki kitab ka  ek panna hai yeh kavita

Comment by Bishwajit yadav on July 28, 2011 at 12:30pm

Ritik bhai...............

bahut he badeya lekah hai aap ne collage me aksar aayesa hota hai............

 

Comment by Ritik 'Hatif' on July 28, 2011 at 10:07am

धन्यवाद Ganesh Jee


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 28, 2011 at 9:31am

///शहर के किसी कालेज की

एक लड़की को याद करता हूँ !
सारे काम उसकी तस्वीर
देखने के बाद करता हूँ !///

बहुत ही नेक आप काम करते है,
बस एक लड़की को याद करते है,
वरना इस शहर का शौक अजीब है,
दो से दोस्ती,चार से प्यार करते है,

:-)))))))))))))

ऋतिक जी स्वागत है आपका ओ बी ओ परिवार में, बहुत ही खुबसूरत कविता से आपने शुरुआत किया है, व्यंग और हास्य पुट के साथ रची गई यह रचना काफी सुंदर बन पड़ी है | बधाई स्वीकार कीजिये |

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