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क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन,

क्रेडिट कार्ड

 

सपना दिखता हैं ,

पावर दिलाता हैं ,

खर्चे में तो तो पंख लगता हैं ,

ना हो पैसा फिर कम हो जाता हैं ,

लगे की दोस्तों में इज्जत बढ़ता हैं,

बिल जब आता हैं ,

पागल बनाता हैं ,

क्यों ली क्रेडिट कार्ड ,

समझ ना आता हैं ,

भाई ये इज्जत लेकर ही जाता हैं ,

.

.

बैंक ऋण

 

पहली पहली बार ये ,

झट पट मिल जाता हैं ,

क्यों की अन्दर की बात ,

समझ में ना आता हैं ,

पैसा जो मिला ,

उसका दूना ले जाता हैं ,

समझ तभी आता हैं ,

जब इंशान फस जाता हैं ,

नहीं दिया पैसा तो ,

गुंडा घर आता हैं ,

.

.

पर्सनल लोन

 

बैंको ने ताना बाना ,

यैसा बनाया हैं ,

आम नागरिक को ,

कैसे फ़साना हैं ,

रहे ये ख्याल ,

इससे बच जाना हैं ,

सपना हसाता यारा ,

हकीकत रुलाता हैं ,

Views: 321

Comment

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Comment by Rash Bihari Ravi on October 20, 2011 at 4:11pm

dhanyavad ashish ji

Comment by आशीष यादव on October 19, 2011 at 6:39pm

guru ji ekdam sahi baat likha hai aapne. badhai ho.

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"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
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"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
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