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मन के बाते मान कर करना तू सब काम ,

मन की बाते मान कर करना तू सब काम ,
मन पे तू जो छोड़ेगा माया मिलेगी या राम ,

मय के चक्कर में पड़ा हैं सारा ये संसार ,
मय तो ऐसी डायन हैं जो कर देगी बेकार ,

माँ बाप को छोड़ कर जो बने ससुराल की शान ,
उसकी हालत ऐसी होए जैसे कुकुर समान ,

मेरी बात जो बुरी लगे लेना गांठ तू बांध ,
काम वो कभी ना करना जिससे हो अपमान ,

पैसे के पीछे सभी भागे पैसा बना अनमोल ,
रिश्ता नाता ख़त्म हुआ अब हैं पैसों का बोल ,

नेता लोग को हम चुन दिए गद्दी बैठाये ,
हमको ही चुना लगा पैसा लिए बनाये ,

किस पर करे विश्वास हम, हमको कोई बताये ,
कोई मूर्ति बनावत हैं कोई राज्य को खाय ,

ऐसे ऐसे लोग यहाँ बन बैठे देव समान ,
मौका मिला तो मालूम पड़ा हैं बड़ा शैतान ,

गुरु की बातो पे कभी, मत देना कोई ध्यान ,
नहीं सुधरेगा हिंद हमारा चाहे जो दे ज्ञान ,

अच्छा लगे तो लिखिए टिप्पणी अपनी आय ,
मेरी लेखनी चल पड़ेगी सुन कर आपकी राय ,

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 31, 2010 at 10:18pm
सुंदर रचना है गुरु जी, धन्यवाद,

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