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हाय रे मदिरा हाय रे - हाय रे मधुशाला ,

हाय रे मदिरा हाय रे - हाय रे मधुशाला ,
तेरे चाह में पड़ कर हमने ये क्या कर डाला ,
घर में बच्चे भूखे सो गए चल रहा हैं प्याला ,
हाय रे मदिरा हाय रे - हाय रे मधुशाला ,

रोज कमाए रोज उड़ाये खाली हाथ घर को जाये ,
बीबी जब कुछ पूछे तो भईया जोर का चाटा खाये ,
सिलसिला यह चल रहा हैं नहीं अब रुकने वाला ,
हाय रे मदिरा हाय रे - हाय रे मधुशाला ,

दोस्तों की दोस्ती से यारो है यह शुरू होती ,
शौक से आगे बढती फिर आदत का रुप यह लेती ,
क्या बतलाऊ इसने तो जीना मुस्किल कर डाला ,
हाय रे मदिरा हाय रे - हाय रे मधुशाला ,

सोच था इक सपना था आगे तक जाने की ,
जाने कैसे बहक गया मैं नजर लगी ज़माने की ,
सोचा था क्या मैंने और ये क्या कर डाला ,
हाय रे मदिरा हाय रे - हाय रे मधुशाला ,

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on August 28, 2010 at 11:56pm
मदिरा पान की बुराइयों को इंगित करती..समाज में एक सुन्दर सन्देश ले जाती रचना के लिए साधुवाद!!!
Comment by Kanchan Pandey on August 28, 2010 at 5:46pm
karodo gharon ko barbad kiya hai es madira ney, achchi rachna,
Comment by Rash Bihari Ravi on August 28, 2010 at 3:05pm
एक ख़ुशी ये देता हैं भेद भाव मिटाकर ,
जाती धर्म कोई हो भईया रखता हैं मिलकर ,
कितना अच्छा काम किया ये बुरा करनेवाला ,
हाय रे मदिरा हाय रे - हाय रे मधुशाला ,
Comment by Rash Bihari Ravi on August 28, 2010 at 2:57pm
रोज रोज ये राहों में नया दोस्त बनता हैं ,
पड़ा देख कर गट्टर में कोई घर ले आता हैं ,
मोहल्ले में इज्जत को ये चवनी का कर डाला ,
हाय रे मदिरा हाय रे - हाय रे मधुशाला ,

पाकेट में है कुछ नहीं बड़ी बड़ी बोल आती हैं ,
दो चार घुट जब ये अन्दर में चली जाती हैं ,
बड़े बड़े को ये तो कंगाल ही कर डाला ,
हाय रे मदिरा हाय रे - हाय रे मधुशाला ,

घर से निकला ऑफिस भाई मैं शान से ,
ऑफिस से जब घर चला बहक गया इमान से ,
दोस्तों की झुण्ड मिली और कचरा कर डाला ,
हाय रे मदिरा हाय रे - हाय रे मधुशाला ,
Comment by baban pandey on August 26, 2010 at 10:39pm
यह सही है गुरु जी ...अगर कमाने वाले ...मदिरा छोड़ दे ...तो उनकी आर्थिक शक्ति समृद्ध हो जायेगी

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 26, 2010 at 9:26pm
बहुत खूब गुरु जी, आप तो बातो बातो मे पूरा पोल खोल दिया है, मदिरा कितनो को यतीम और बिधवा बना दिया, गिनती करने की जरूरत नहीं, अच्छी रचना,

कृपया ध्यान दे...

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