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यही है ख़ुदाई उसकी, छोटी सी ये इल्तजा,
जो कभी की थी उससे, पूरी वो न कर सका;

तेरे मेरे बीच हैं अब, मीलों के फ़ासले
कभी सामने थे तुम, आज हो गए परे

तेरे मेरे बीच हैं…

एक वो भी लम्हा था, तुम थे मेरे रूबरू,
दीद भी हुआ नायाब, ढूँढता हूँ चार सू;
फिर भी एक यक़ीं सा है, ज़िंदगी अजीब है
दूर हो के भी तू मुझसे, और भी क़रीब है

तेरे मेरे बीच हैं…

अब नहीं है कोई हसरत, और कुछ न है चाहत,
सफ़रे आख़िरत से भी, मिलेगी नहीं राहत;
चंद क़दमों की है दूरी, और है वही मजबूरी

इस जनम मुकम्मल न हो, अगले जनम होगी पूरी
तेरे मेरे बीच हैं..
.


http://www.youtube.com/watch?v=S77jz2KTgQo

(उपर्युक्त यू ट्यूब लिंक पर क्लिक कर के मेरी आवाज़ में इस गीत को अवश्य सुनें)

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Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 23, 2012 at 1:32pm

जी वीनस जी! प्रयासरत हूँ जानता हूँ कि कुछ भी आसानी से नहीं मिलता उसके लिए बड़े यत्न करने पड़ते हैं| आपके सहयोग का आकांक्षी हूँ|

Comment by वीनस केसरी on March 23, 2012 at 1:06pm

आप जो लिख रहे हैं वो अपने आप में खुद शिल्पगत है
आप अच्छा लिखते हैं मुदित हूँ

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 23, 2012 at 12:56pm

वीनस जी,

मन में जो कुछ भी आता है लिख डालता हूँ कभी वो अच्छा भी होता है कभी नहीं भी होता| आपको भाव पसंद आये इसके लिए शुक्रगुज़ार हूँ शिल्प पर आपसे सहयोग मिला रहा है.. ग़ज़ल कक्षा के पाठों को आत्मसात करने में कुछ वक़्त लगेगा| :))

Comment by वीनस केसरी on March 23, 2012 at 12:34pm

अब नहीं है कोई हसरत, और कुछ न है चाहत,
सफ़रे आख़िरत से भी, मिलेगी नहीं राहत;


आपका दर्द दर्दे हकीकी से दर्दे मजाजी हो रहा है

इस श्रेष्ठता को सलाम

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 10, 2012 at 1:35pm

आपका हार्दिक आभार राज जी| धन्यवाद,

Comment by राज लाली बटाला on March 8, 2012 at 9:29pm

good voice !! liked एक वो भी लम्हा था, तुम थे मेरे रूबरू,
दीद भी हुआ नायाब, ढूँढता हूँ चार सू;~~~

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 3, 2012 at 4:21pm

आपने रचना के मर्म को समझा और अपनी दाद दी उसके तहे दिल से शुक्रिया नीरजा जी|

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 3, 2012 at 1:50pm
सराहना के लिए आभार मृदु जी|
Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on March 3, 2012 at 12:19pm

भाव पूर्ण रचना बधाई स्वीकार करें 

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 3, 2012 at 12:13pm

आदरणीय अभिनव जी आपका तहेदिल से शुक्रिया|

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