For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हर दिल अज़ीज़....

हर दिल अज़ीज़....

रिश्तों को निभा लेने की जिसमे तमीज है,
यकीन मानिये   वो ,   हर-दिल- अज़ीज़ है.
#
ठहरा रहे जमीं को, क्योंकर कुसूरवार,
पौधे  वही  उगेंगे,  बोये  जो  बीज है!
#
उनको दवा न दीजिये,आँखों क़े मर्ज़ की,
नज़रें   चुरा  रहें  वो, दिल क़े मरीज़ हैं.
#
पत्थर सा सख्त चेहरा,रखते हैं जो यहाँ,
दो  घडी  में  पर  वो,  जाते  पसीज  हैं.
#
सिरहाने का  तकिया ,  उसको  बनाइये,
मुश्किलों से हाँथ में , आई  जो  चीज़ है.
#
अविनाश बागडे....

Views: 576

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by AVINASH S BAGDE on March 23, 2012 at 5:31pm

आपका ह्रदय से आभार.नीरज भाई...आपने तो इस अंदाज में दाद दी है कि मै निरुत्तर हूँ.

Comment by AVINASH S BAGDE on March 23, 2012 at 5:26pm

Seema agrawal  mam...bahut-bahut aabhar.

Comment by AVINASH S BAGDE on March 12, 2012 at 10:19am

संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' जी....बहुत-बहुत धन्यवाद...

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 11, 2012 at 7:43pm

आदरणीय अविनाश जी,

उनको दवा न दीजिये,आँखों क़े मर्ज़ की,
नज़रें   चुरा  रहें  वो, दिल क़े मरीज़ हैं.
वाह-वाह!! बहुत ख़ूब!! निःशब्द हो गया मैं तो|
Comment by AVINASH S BAGDE on March 11, 2012 at 4:10pm

भाई अभिनव जी, हरीश जी ..बहुत-बहुत धन्यवाद...
Comment by AVINASH S BAGDE on March 11, 2012 at 4:09pm

आदरणीय सौरभ जी और वीनस जी,

आपकी बातो से मै सौ फी सदी सहमत हूँ......कोशिशें सुधरने की जारी रहेगी....आभार.
Comment by Abhinav Arun on March 11, 2012 at 3:57pm
रिश्तों को निभा लेने की जिसमे तमीज है,
यकीन मानिये   वो ,   हर-दिल- अज़ीज़ है.
वाह वाह श्री अविनाश जी यकीन मानिये गांठ बाँध ली मैंने |एक एक शेर बोल रहा है !! बधाइयाँ !!
Comment by Harish Bhatt on March 11, 2012 at 12:39pm

Avinaash ji namastey.

sahi baat hai. 

ठहरा रहे जमीं को, क्योंकर कुसूरवार,

पौधे  वही  उगेंगे,  बोये  जो  बीज है!
Comment by वीनस केसरी on March 10, 2012 at 11:06pm

सुन्दर भाव है

आगे  जो कहना चाह रहा हूँ सौरभ जी पहले ही कह चुके हैं


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 10, 2012 at 11:03pm

भाई अविनाशजी, भाव बहुत ही अच्छे हैं. सादर बधाई स्वीकार करें. हाँ, ग़ज़ल के शिल्प के लिहाज से अभी बहुत कुछ करना है.

मैं कुछ कहूँ इससे पूर्व ही आप समझ सकते हैं कि मैं क्या कह रहा हूँ.

 

ठहरा रहे जमीं को, क्योंकर कुसूरवार,
पौधे  वही  उगेंगे,  बोये  जो  बीज है! ..   इतने खूबसूरत भावों से पगे इस शेर से शुतुर्गुर्बा का दोष तो दूर किया ही जा सकता है.
इस मंच की सीखने-सिखाने की प्रक्रिया का वास्ता, हम-आप मिलजुल कर बहुत कुछ सीखते-समझते जायेंगे. 
सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे -रिश्ता
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी रिश्तों पर आधारित आपकी दोहावली बहुत सुंदर और सार्थक बन पड़ी है ।हार्दिक बधाई…"
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"तू ही वो वज़ह है (लघुकथा): "हैलो, अस्सलामुअलैकुम। ई़द मुबारक़। कैसी रही ई़द?" बड़े ने…"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"गोष्ठी का आग़ाज़ बेहतरीन मार्मिक लघुकथा से करने हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह…"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आपका हार्दिक आभार भाई लक्ष्मण धामी जी।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"ध्वनि लोग उसे  पूजते।चढ़ावे लाते।वह बस आशीष देता।चढ़ावे स्पर्श कर  इशारे करता।जींस,असबाब…"
Sunday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"स्वागतम"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
Saturday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service