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हम भोजपुरिया हई भाई हो बिहार के ,

हम भोजपुरिया हई भाई हो बिहार के ,
जन देई देहब जे मंगबा तू प्यार से ,
हम भोजपुरिया हई हो बिहार के ,
छपरा में घर बाटे थाना हटे एकमा ,
परसा गढ़ से ता आगे केशरी बाज़ार बा ,
ओही जा त मठिया में भाई घर हमर बा ,
हमारा से मिले के बा तब जानी एतना,
कोल्कता में रही ले फिल्म हमार सपना ,
तिरहाटी आ जयेम मिलन होई यार के ,
हम भोजपुरिया हई भाई हो बिहार के ,
ट्रांसपोर्ट में नोकरी करीले इ ता रउआ जानी ,
दोस्त के हम दोस्त हई इ ता रउआ मानी
अइसन जमाना आइल बाटे राउये इ देखि ,
काम निकल जाई ता केहू राउआ के न पूछी ,
मतलब के इहा इयार बा खोजी रउआ जेतना ,
फायदा कबो न होला नेह नाता बिगार के ,
हम भोजपुरिया हई भाई हो बिहार के ,

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Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on April 19, 2010 at 4:59pm
अइसन जमाना आइल बाटे राउये इ देखि ,
काम निकल जाई ता केहू राउआ के न पूछी ,
मतलब के इहा इयार बा खोजी रउआ जेतना ,
फायदा कबो न होला नेह नाता बिगार के ,
हम भोजपुरिया हई भाई हो बिहार के

bilkul sahi likhle bani guru jee.....aajkal ke zamana me dher log matlab ke hi yaar baa...matlab nikal gaila ke puchi bhi naa waisan log...
Comment by Admin on April 19, 2010 at 4:27pm
अइसन जमाना आइल बाटे राउये इ देखि ,
काम निकल जाई ता केहू राउआ के न पूछी ,
मतलब के इहा इयार बा खोजी रउआ जेतना ,
फायदा कबो न होला नेह नाता बिगार के ,
हम भोजपुरिया हई भाई हो बिहार के ,

गुरु जी आजकल ईहे जमाना बा ,जब तक रौवा से मतलब बा तबले रौवा इयार बानी, मतलब निकल जाई त आदमी सब रिश्ता नाता भुला जात बा,आश्चर्य होत बा लोगन के स्वभाव पर का हमनी के अन्दर के आदमी मर चुकल बा ? ई अब सोचे के पडत बा, लेकिन एही ज़माना मे अबहियो लोग बा जे भावना खातिर पैसा रुपइया आ समय सब के साथ जुडल बा, पर आखिर कहिया ले जहिया ओकरा भावना के ठेस पहुची का गुजरी वोह आदमी पर, और आज ना त काल बनावटी चेहरा पर से पर्दा उठ ही जाई,आ शायद तब तक बहुत ही देर हो गइल रही, अबो समय बा की आदमी धूर्त लोगन के पहचान के आपन रास्ता सही कर लेव ना त इहे सब कोई कही की, "सबकुछ लुटा के होश मे आये तो क्या हूवा"
बहुत बढ़िया राउर ई कविता बा समाज के आँख खोले वाला , बहुत बहुत धन्यबाद इ पोस्ट खातिर,

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