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बलिदानों का क्या फल पाया बाबाजी

हाय ! ये कैसा मौसम आया बाबाजी
देख के मेरा मन घबराया बाबाजी

पूरब में तो बाढ़ का तांडव मार रहा
उत्तर में है सूखा छाया बाबाजी

भीषण गर्मी के झुलसाये लोगों को
मानसून ने भी तरसाया बाबाजी

चिदम्बरम को देख के ऐसा लगता है
लुंगी में कीड़ा घुस आया बाबाजी

लोकराज में जनता का दिल घायल है
बलिदानों का क्या फल पाया बाबाजी

इन्टरनेट पे प्यार का ये परिणाम मिला
युवक ने अपना प्राण गंवाया बाबाजी

ये कैसा जीवन है, जिसमे चैन नहीं
'अलबेला' को रास न आया बाबाजी


__अलबेला खत्री

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Comment

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Comment by Albela Khatri on July 12, 2012 at 1:56pm

धन्यवाद रेखा जी......
आपके प्रशंसा-पत्र से थोड़ा  सा चैन तो मिला ...........हा हा हा
__विनम्र आभार !

Comment by Albela Khatri on July 12, 2012 at 1:53pm

यह सच है  आदरणीय सीमा जी कि  मेरी बातचीत भी आमतौर पर ऐसी ही होती है  रसपूर्ण और लयबद्ध, परन्तु आपने  यह भांप लिया तो  आपकी मेधा  के समक्ष नत होना ही  पड़ेगा

__आपकी स्नेहिल और ऊर्जस्वित टिप्पणी ने  बहुत सुकून बख्शा है

___आपका आभार !

Comment by Rekha Joshi on July 12, 2012 at 1:52pm

अलबेला जी 

ये कैसा जीवन है, जिसमे चैन नहीं 
'अलबेला' को रास न आया बाबाजी ,सत्य है बाबा जी कहीं तो चैन मिले ,अलबेली रचना पर बधाई 
Comment by Albela Khatri on July 12, 2012 at 1:32pm

सम्मान्य अरुण जी...
हो सकता है  मैं यों तो न भी लिखता परन्तु अब तो गली के पत्थर पर भी लिखनी ही पड़ेगी एक ग़ज़ल ताकि  उसका भी अहिल्योद्धार हो जाये....हा हा हा
__बहरहाल आपकी सराहना ने बैटरी चार्ज कर दी...........आभार !

Comment by Albela Khatri on July 12, 2012 at 1:27pm

आदरणीय संदीप द्विवेदी जी.........
रचना आपको पसन्द आई......मेरा मन गदगद हो गया
आपकी स्नेहिल टिप्पणी ने निहाल कर दिया
________आभार !

Comment by Arun Sri on July 12, 2012 at 1:26pm

चिदम्बरम को देख के ऐसा लगता है
लुंगी में कीड़ा घुस आया बाबाजी  ............ क्या कहने बाबा जी के एक बार फिर ! आप तो गली में पड़े पत्थर पर भी गज़ल लिख दें ! इसे कहते है कवि की नज़र और लुंगी में कीड़ा ! हा हा हा हा !

Comment by Albela Khatri on July 12, 2012 at 1:25pm

बहुत बहुत धन्यवाद आपका अरुण शर्मा अनंत जी...
आभार

Comment by Albela Khatri on July 12, 2012 at 1:23pm

आपका कोटि कोटि धन्यवाद संदीप जी.......
आते रहिये....
मिलते रहिये........

Comment by Albela Khatri on July 12, 2012 at 1:22pm


बाबाजी की ओर से सबसे पहले तो
आपके आने का शुक्रिया
फिर बांचने का शुक्रिया
फिर पसन्द करने का शुक्रिया
फिर टिप्पणी करने का शुक्रिया
सबसे  ख़ास प्रोत्साहन देने का शुक्रिया ...........

___धन्यवाद राजेश कुमारी जी.........


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 12, 2012 at 12:55pm

ग़ज़ल पढनी शुरू की तो अचम्भा हुआ अलबेला और इतनी सीरियस गंभीर ग़ज़ल चौथे शेर पर आते ही पता चला हाँ ये अलबेला की ही ग़ज़ल हो सकती है गंभीर ग़ज़ल में भी चिदंबरम का कीड़ा घुसा दिया आदत से बाज नहीं आओगे बाबा जी ....बहरहाल मुद्दे की बात करते हैं बहुत बहुत कमाल की ग़ज़ल लिखी है बधाई 

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