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महुआ ,
एगो उ दिन रहे ,
एगो आज के दिन बा ,
इ ओह दिनों पुछात रहे ,
आजो पुछात बा,
अंतर एतने बा ,
कलह घर बसवात रहे ,
आज घर उजारत बा ,
महुआ ,
एगो उ दिन रहे ,
एगो आज के दिन बा ,
महुआ टपकल ,
घरे आइल ,
लपसी बनल
मजा आइल ,
अब लपसी कहा भेटात बा .
महुआ ,
एगो उ दिन रहे ,
एगो आज के दिन बा ,
महुआ सुखल ,
खूब भुजाइल ,
तीसी के संगे ,
लाटा कुटाइल ,
अब लाटा कहा भेटात बा ,
महुआ ,
एगो उ दिन रहे ,
एगो आज के दिन बा ,
अब महुआ ,
हाड़ी पर चढत बा ,
अब लपसी ना ,
दारू बनत बा ,
अब केहू के पेट नइखे भरत ,
जेब खाली होत बा ,
बबुआ मस्ती में बारन ,
परिवार रोआत बा ,
महुआ ,
एगो उ दिन रहे ,
एगो आज के दिन बा ,

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 1, 2010 at 3:33pm
Guru jee aap apaney kavita aur mahuwa key madhyam sey kal aaj aur kal ki tulana bahut hi achey sey ki hai,bahut badhiya hai aapki rachna,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on April 30, 2010 at 10:22pm
bahut badhiya likhle bani guru jee.....admin jee bilkul sahi kahni....
kail bhi kaa jaa sakela ee debe wala log samjho tab nu.....
klhair chodi blog badhiya likhle bani...maja aa gail padh ke
Comment by Admin on April 30, 2010 at 5:50pm
बहुत बढ़िया गुरु जी, सब समय समय की बात है , समय के साथ सब कुछ का स्वरुप बदल जाता है,महुआ भी उससे अछुता नहीं रहा,अब देखिये न नया न्यूज़ आया है की विजय माल्या की नजर मुजफरपुर बिहार की प्रसिद्ध लिच्ची पर पड़ गया है वो किसानो के बागीचो को लिज पर लेकर लिच्ची से शराब बनायेगे , अब महुआ की तरह कुछ दिनों मे लिच्ची का भी स्वाद भूल जाना पडेगा |
बहरहाल बहुत ही बढ़िया कविता है, धन्यवाद आपका ,

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