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सिर्फ उनकी यादें...

मेरे इस दिल का हर साज उनका है,
इस दिल में दबा हर राज उनका है,
चाहे दिन हो या रात उनका है,
सबसे जुदा, अलग अंदाज उनका है,
मैं आज जो भी और जैसा भी हूँ,
मेरी सफलता के पीछे हाथ उनका है,
भले ही आज नाखुश हूँ अपनेआप से पर,
याद कर खुश होता हूँ वो हर याद उनका है,
वो जहाँ भी रहे सदा खुश रहे दुआ है मेरी
मेरा दिल आज भी सिर्फ तलबगार उनका है,
मेरे इस दिल का हर साज उनका है ऐ 'अनिश',
इस दिल में दबा आज भी हर राज उनका है....!

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Comment

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Comment by Neelkamal Vaishnaw on September 3, 2012 at 10:56am

बहुत बहुत धन्यवाद @Rajesh kumari जी, @Saurabh Pandey जी,,, आप बड़ों का यूँ ही स्नेह और सलाह हमेशा प्रार्थनीय है, आप लोगों कि सलाह मुझमें जरुर निखार लायेगी,,, धन्यवाद त्रुटियों कि ओर इंगित करने हेतु...


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 2, 2012 at 7:56pm

आप अपनी भावनाओं को संप्रेषित करते रहें किन्तु इस संप्रेषण हेतु उचित साधन होना भी जरूरी है. यह साधन है भाषा व्याकरण, स्वाध्याय और पद्य-शिल्प के प्रति गंभीर नज़रिया.  यह सभी नये रचनाकारों के लिये मूल मंत्र होना चाहिये.

शुभेच्छाएँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 2, 2012 at 7:36pm

अच्छा लिखा है राज के साथ दबी नहीं दबा होना चाहिए राज पुर्लिंग में आता है लिखते रहिये बधाई एवं शुभकामनाएं 

कृपया ध्यान दे...

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