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दर्द अगर न मिलता तो 
क्या जानते कैसा होता है
हमको सताकर वोह भी 
शायद कितना रोता है 
********
हादसों नें मुझको कहीं का न छोड़ा
फिर भी हमने दोस्तो  जीना नहीं छोड़ा
हर हाल में जीते रहे हम हँस हँस के यारो
घूँट दर्द-ओ-ग़म  का  पीना नहीं छोड़ा    
दीपक कुल्लुवी  

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Comment

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Comment by Deepak Sharma Kuluvi on September 11, 2012 at 3:13pm

thanks mahima ji

Comment by MAHIMA SHREE on September 11, 2012 at 11:56am

हादसों नें मुझको कहीं का न छोड़ा

फिर भी हमने दोस्तो  जीना नहीं छोड़ा
हर हाल में जीते रहे हम हँस हँस के यारो
घूँट दर्द-ओ-ग़म  का  पीना नहीं छोड़ा  
बहुत खूब .. आदरणीय कुल्लवी जी .. बधाई 
Comment by Deepak Sharma Kuluvi on September 11, 2012 at 10:43am

शुक्रिया मैडम ....

Comment by Rekha Joshi on September 10, 2012 at 9:22pm

दर्द अगर न मिलता तो 

क्या जानते कैसा होता है
हमको सताकर वोह भी 
शायद कितना रोता है ,सुंदर अभिव्यक्ति दर्दे-दिल की दीपक जी ,बधाई 

कृपया ध्यान दे...

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