For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सम्पूर्ण ओ बी ओ परिवार की ओर से आप सभी मित्रों को अभियंता दिवस की हार्दिक बधाई !

(गीतिका छंद आधारित मुक्तक)

हो बधाई बंधु अग्रज, याद अब प्रतिदिन यहाँ.   

जन्मदिन शुभ आपका मिल, कर मनाते जन यहाँ.

आप मानक थे यहाँ इं-,जीनियर के रूप में. 

विश्वेश्वरैया मोक्षगुंडम, सर नमन वंदन यहाँ..

--अम्बरीष श्रीवास्तव

Views: 475

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 15, 2012 at 9:33pm

गीतिका की पंक्ति भाई, खूब रोचक बन पड़ी.. .
मैं बधाई कह रहा हूँ औ’ करूँ चर्चा बड़ी
जानना रोचक है बंधु, गीतिका की भी विधा
चौदवीं पर है प्रथम यति, कुल गिनें छब्बिस कड़ी

Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 15, 2012 at 9:01pm

स्वागत है आदरणीय अभिनव जी, एकदम सत्य कहा है आपने हार्दिक आभार मित्रवर .......!

Comment by Abhinav Arun on September 15, 2012 at 4:35pm

ओ बी ओ परिवार के समस्त मित्रों को अभियंता दिवस पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !! साहित्य में विद्यमान लय - छंद - तुक इन सबमें भी एक अभियंत्रण ही है और हम सब इस पथ पर सफलता पूर्वक आगे बढे | समाज को साहित्य कुछ दे पाए इसी में शब्दों की सार्थकता है !! सो साधुवाद , साधुवाद !!

Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 15, 2012 at 2:42pm

धन्यवाद मित्र ! आदरणीय इं० गणेश जी बागी सहित सभी मित्रों को अभियंता दिवस की बहुत-बहुत बधाई


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 15, 2012 at 2:16pm

आदरणीय अम्बरीश जी और ओ बी ओ के सभी साथियों को अभियंता दिवस की हार्दिक बधाई |

Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 15, 2012 at 2:05pm

धन्यवाद प्रिय संदीप जी !

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on September 15, 2012 at 2:04pm

आप को भी अभियंता दिवस की हार्दिक बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
1 hour ago
Sushil Sarna posted blog posts
16 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
17 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
22 hours ago
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service