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वोह दूर क्या हुए 

इतनी दूर हो गए 
मेरी मुहब्बत के शायद 
हर किस्से भूल गए 
किससे करें शिक्वा-ए-दिल          
किससे  करें गिला 
जिंदगी के आखरी लम्हात में 
हम तन्हा  हो गए
'दीपक' था जलता क्यूँ न 
जलकर लुत्फ़ ही आया 
लेकिन मुझको जलाकर वोह 
खामोश चले गए 
दीपक कुल्लुवी 
09350078399
19/11/12.  

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Comment by Deepak Sharma Kuluvi on November 21, 2012 at 9:59am
शुक्रिया सभी का जो हमारी रचना पसंद की ........

यह कोई दर्द नहीं हम भी मज़े लेते है 

बीबी की डांट डपट हँसते रोते सहते हैं  
दीपक कुल्लुवी 
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 20, 2012 at 11:03am
अछे भावो की अभिव्यक्ति बाधा दीपक जी, ऐसे ही मेरे भाव है -
वो खामोश चले गए और मुझे खामोश् कर गए
क्यों की उनके बाद मेरे पास शब्द ही न रहे ।
Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on November 20, 2012 at 10:58am

दीपक जी सभी का यही दर्द है...बहुत सुंदर ढंग से आप ने अपनी भावनाओं को सजोया है है इस रचना में।बधाई स्वीकार करें। 

Comment by shalini kaushik on November 20, 2012 at 12:27am

nice

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