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shalini kaushik
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shalini kaushik's Discussions

क्या केजरीवाल का ये तरीका सही है ?
14 Replies

क्या केजरीवाल का ये तरीका सही है ?अक्सर मन में विचार आता है कि क्या अरविन्द केजरीवाल द्वारा लगातार ढूंढ ढूंढकर भ्रष्ट नेताओं को निशाना बनाना व् आरोपों की झड़ी लगाने का तरीका सही है ?सभी जानते हैं कि…Continue

Started this discussion. Last reply by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला Nov 7, 2012.

सच्चाई आज की ;मेरी नज़रों में
3 Replies

आज दशहरा है और आस पास के घरों में बाहर गए बेटे बहुओं की…Continue

Tags: parivar, ke, aaj

Started this discussion. Last reply by shikha kaushik Oct 24, 2012.

 

Welcome, shalini kaushik!

Profile Information

Gender
Female
City State
kandhla/utter pradesh
Native Place
kandhla
Profession
advocate
About me
i want to help victims.i love my sister very much.i hate childish person.i like sweet....

Shalini kaushik's Blog

क़त्ल करने मुझे देखो , कब्र में घुस के बैठे हैं .

नहीं वे जानते मुझको, दुश्मनी करके बैठे हैं ,

मेरे कुछ मिलने वाले भी, उन्हीं से मिलके बैठे हैं ,



समझकर वे मुझे कायर, बहुत खुश हो रहे नादाँ

क़त्ल करने मुझे देखो , कब्र में घुस के बैठे हैं .



गिला वे कर रहे आकर , हमारे गुमसुम रहने का ,

गुलूबंद को जो कानों से , लपेटे अपने बैठे हैं .



हमें गुस्ताख़ कहते हैं , गुनाह ऊँगली पे गिनवाएं ,

सवेरे से जो रातों तक , गालियाँ दे के बैठे हैं .



नतीजा उनसे मिलने का , आज है सामने आया ,

पड़े हम…

Continue

Posted on January 10, 2015 at 11:00pm — 7 Comments

बाल मज़दूरी -हमारी मज़बूरी .

”बचपन आज देखो किस कदर है खो रहा खुद को ,

उठे न बोझ खुद का भी उठाये रोड़ी ,सीमेंट को .”

........................................................................

”लोहा ,प्लास्टिक ,रद्दी आकर बेच लो हमको ,

हमारे देश के सपने कबाड़ी कहते हैं खुद को .”

.......................................................................

”खड़े हैं सुनते आवाज़ें ,कहें जो मालिक ले आएं ,

दुकानों पर इन्हीं हाथों ने थामा बढ़के ग्राहक को .”…

Continue

Posted on June 15, 2014 at 11:30pm — 3 Comments

पर्दे शर्म के सारे तार-तार हो गए हैं .

बेख़ौफ़ हो गए हैं ,बेदर्द हो गए हैं ,

हवस के जूनून में मदहोश हो गए हैं .

चल निकले अपना चैनल ,हिट हो ले वेबसाईट ,

अख़बारों के अड्डे ही ये अश्लील हो गए हैं .

पीते हैं मेल करके ,देखें ब्लू हैं फ़िल्में ,

नारी का जिस्म दारू के अब दौर हो गए हैं .

गम करते हों गलत ये ,चाहे मनाये जलसे ,

दर्द-ओ-ख़ुशी औरतों के सिर ही हो गए हैं .

उतरें हैं रैम्प पर ये बेधड़क खोल तन को…

Continue

Posted on May 11, 2013 at 12:30am — 11 Comments

हमको नवाज़ी ख़ुदा ने मकसूम शख्सियत ,

 

  Thai Massage

फरमाबरदार बनूँ औलाद या शौहर वफादार ,

औरत की नज़र में हर मर्द है बेकार .



करता अदा हर फ़र्ज़ हूँ मक़बूलियत  के साथ ,

माँ की करूँ सेवा टहल ,बेगम को दे पगार .

 

मनसबी रखी रहे बाहर मेरे घर से ,

चौखट पे कदम रखते ही इनकी करो मनुहार .

 

फैयाज़ी मेरे खून में ,फरहत है फैमिली ,

फरमाइशें पूरी करूँ ,ये फिर भी हैं बेजार .



हमको नवाज़ी ख़ुदा ने मकसूम शख्सियत…

Continue

Posted on April 17, 2013 at 1:36am — 6 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 1:43pm on October 27, 2012, Mukesh Kumar Saxena said…

"आपने मेरी कविता की जो सराहना की है वह मेरे लिए अनमोल है । "

At 9:18pm on October 2, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 8:39am on June 11, 2011, Tapan Dubey said…
thanks shaliniji
At 5:28pm on January 12, 2011, Sanjay Rajendraprasad Yadav said…

शालिनी जी आप को मेरा नमस्कार 

और साथ में OBC  को धन्यवाद,

आपने मानव और मानवता को थोडा समय देकर बेहतरीन तरीके से समझा दिया है
आज सच्चाई हर तरफ हार रही है, पर हर तरफ लोग झूठ को क्यूँ अपना रहे है ,
आज हर कोई ऐसो आराम की जिंदगी जीना चाहता है  इस लिए नर हो या नारी लोक -लाज ,मान-सम्मान की परवाह किये बेगैर किसी भी हद तक जाने की तैयारी कर लेता है ,
At 3:12pm on December 17, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 5:43pm on December 13, 2010, Admin said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन के मुख्य पृष्ठ पर दाहिने तरफ दो हिंदी लेखन टूल पहले से दिया हुआ है, पहला "

हिन्दी यहाँ टाइप करे...

तथा दूसरा Tool  Box  मे देवनागरी लिखने के लिये यहाँ क्लिक करे... 

इसके अलावा एक और हिंदी लेखन टूल नीचे दिये गये लिंक पर मिल सकता है , पुनः किसी भी प्रश्न का स्वागत है |

http://www.openbooksonline.com/forum/topics/5170231:Topic:27913?id=5170231%3ATopic%3A27913&page=1#comments

At 10:01am on December 13, 2010, Admin said…

At 7:39pm on December 4, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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"आदरणीय गणेश जी 'बागी' जी आदाब और बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने के लिए आपका शुक्रगुज़ार हूँ…"
22 hours ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी, अच्छी ग़ज़ल कही है, दाद कुबूल करें ।"
22 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"ग़ज़ल 1212 1122 1212 22 जुनूँ गज़ब का मगर ये अज़ब कहानी है तलाश जारी है क्या चाँद में भी पानी है इधर…"
22 hours ago
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"बेहतरीन बाल गीत, बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीय सतविन्द्र सरजी। "
22 hours ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"सराहना हेतु आभार आदरणीया बबिता गुप्ता जी."
22 hours ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आभार आदरणीय डॉ छोटे लाल जी, सराहना से रचना सार्थक हुई."
22 hours ago
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"बेहतरीन पंक्तियाँ, आदरणीय गणेश सरज बधाई स्वीकार कीजिएगा।"
22 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आदरणीया  बबिताजी हृदय से धन्यवाद आभार आपका"
22 hours ago
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"बेहतरीन पंक्तियाँ चांद को परिभाषित करती,बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीय लक्ष्मण सरजी। "
22 hours ago
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"स्नेह के साथ हिम्मत बंधाती पंक्तियाँ आदरणीया प्रतिभा दी बधाई स्वीकार कीजिएगा ।"
22 hours ago

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