For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मैंने कुछ पंख जोड़ रखे हैं

मैंने कुछ पंख जोड़ रखे हैं 
कुछ रंगीन कुछ बदरंगे हैं
ज़रा हलके से हैं ये थोडे से 
फूलों के संग ही मोड़ रखे हैं

मेरे पंखों में खुशबू फूलों की
उड़ेंगे संग में सुरभि की तरह
मन की उड़ान से अब क्या होगा
सच में उड़ना है बोल सच्चे हैं

कोई कहता है ज्ञान सागर है 
मगर चिंतन में डुबकियां ही नहीं
कोई उड़ता है हवा बाजों सा
कहीं बैसाखियों में दम ही नहीं

अब तो इजाद है करना मुझको
हींग या फिटकरी नहीं चहिए
दूरियां हैं बहुत आसान नहीं
आज शब्दों की मात मत कहिये

जाने कितनी गजल तराने बने
पर हकीकत है ये नावाकिफ से
भूख की शक्ल में जो इन्सां है
भेड़ियों की तरह अब गाफिल है

कितनी बातें लिखी किताबों में
कहाँ होती हैं मुक्कम्मल बोलो 
एक रोटी जो खाई कल उसने
तोल कर वजन पंख से बोलो ,

Views: 292

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SUMAN MISHRA on January 9, 2013 at 3:38pm

विनय सर आपको ये पंक्तियाँ अची लगी ,,,बहुत बहुत आभार

Comment by vijay nikore on January 8, 2013 at 7:01pm

सुमन जी,

  • मैंने कुछ पंख जोड़ रखे हैं
    कुछ रंगीन कुछ बदरंगे हैं
    ज़रा हलके से हैं ये थोडे से
    फूलों के संग ही मोड़ रखे हैं 

अति सुन्दर भाव। बधाई।

विजय निकोर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . क्रोध
"क्रोध बैर का मूल है, क्रोध घृणा की आग ।क्रोध अनल के कब मिटे, अन्तर्मन से दाग वाह वाह…"
Feb 15

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...मैं नहीं हूँ
"रोचक रदीफ लेकर निभाना चाहा है आपने बृजेश जी. कुछॆक मिसरा-ए-सानी को छोड़ दें तो आप सफल भी रहे…"
Feb 15

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"शीत को केन्द्र में अख कर अच्छे दोहे निकाले हैं आपने, आदरणीय सुशील सरना जी.  हार्दिक…"
Feb 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -कुछ थे अधूरे काम सो आना पड़ा हमें.
"फिर अपनी ख़ाक ही से न उगने लगे कहींसो हम जो मर गए तो जलाना पड़ा हमें. क्या-क्या सोच लेते हैं, आप भी…"
Feb 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . . सन्तान
"अत्यंत ही गहन, प्रासंगिक और सार्थक दोहों के लिए हार्दिक बधाइयाँ, आदरणीय सुशील सरना जी. "
Feb 14
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164

परम आत्मीय स्वजन,ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 164 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का…See More
Feb 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आ. भाई मनेज जी, अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Feb 14
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"बहुत बहुत आभार आदरणीय वर्मा जी सादर"
Feb 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-160
"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
Feb 11
Shyam Narain Verma commented on डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा's blog post 26 जनवरी 2024 अमृतकाल का 75वा गणतंत्र
"नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर देश भक्ति गीत, हार्दिक बधाई l सादर जय हिंद"
Feb 11
Shyam Narain Verma commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Feb 11
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-160
"बहुत उत्तम दोहों का सृजन लक्ष्मण भाई। बहुत बधाई"
Feb 11

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service