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मेरे दरवाजे पे दस्तक हुई,
मैंने अन्दर से ही पूछा,
आप कौन हो,
उत्तर मिला,
सुख समृद्धि,
झट से दरवाजा खोला,
अन्दर आइये उनसे बोला,
उनका जबाब था,
मैं हमेशा से उनके साथ रहता हूँ,
जो प्यार से मिल कर रहते हैं,
जहा भी मेल मिलाप रहेगा,
वहाँ मैं दस्तक देता रहूँगा,

एक दिन घर में हो गया,
अपनों में झगड़ा,
बिना मतलब का,
बाते बढ़ी,
कोई भी किसी काम में,
विचार लेना देना छोड़ दिया,
घर को विपत्ति के रूप में,
कलह जकड़ लिया,
अब सुख समृद्धि नहीं आता हैं ,
दस्तक देने,
विपत्ति की राज हैं घर में,
दोस्तों मिल कर रहो,
विपत्ति नहीं सुख समृद्धि को बुलावो,

Views: 108

Comment

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Comment by आशीष यादव on November 8, 2010 at 6:42pm
guru ji sundar prerak rachna ke liye badhai
Comment by Rash Bihari Ravi on November 6, 2010 at 6:13pm
dhanyabad ganesh jee

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 6, 2010 at 10:09am
संदेशपरक रचना हेतु बधाई गुरु जी |

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