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मौसम का मिजाज बिगड़ गया है ।।

वसंत जाने कहाँ उड़ गया है ...।
मौसम का मिजाज बिगड़ गया है ।।
बारिस ने ऐसा कहर ढा दिया है ;
कोयल से सुर ही बिछड़ गया है ...।।
बर्फ इतने गिरे, मेघ रुकते नही ;
जैसे धरा से गगन झगड़ गया है ।।
जितना दूषित जल, उतना ही पवन ;
बनकर दानव प्रदूषण अकड़ गया है ...।।
छोड़ विज्ञान की, बातें भगवान् की
अपना ही मंदिर उजड़ गया है ......।।

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Comment by श्रीराम on February 13, 2013 at 11:05pm
thanks...
Comment by Alpana Verma on February 10, 2013 at 12:34am

सामायिक प्रस्तुति है.

Comment by Dr.Ajay Khare on February 8, 2013 at 11:29am

jai shri ram ji badalte mousam ke mijaj ka sunder chitran kiya he badhai

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