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बलिया मे छठ पूजा, बागी की नजर से ....

सर्व शक्तिमान एवं प्रत्यक्ष भगवान सूर्य के उपासना का पर्व छठ पिछले दिनों उत्तर भारत सहित पूरे भारत मे काफी श्रद्धा और उल्लास से मनाया गया, बिहार से सटे उत्तर प्रदेश के बलिया जिले मे भी छठ का पवित्र त्यौहार धूम धाम से मनाया गया |
इस त्यौहार की खास बात यह है कि छठ पूजा मे प्रथम अर्ध्य डूबते हुये सूर्य को दिया जाता है तथा दूसरा अर्ध्य उगते हुये सूर्य का किया जाता है, यह परंपरा एक बहुत ही प्रसिद्ध कहावत कि " उगते सूर्य को सभी सलाम करते है तथा डूबते सूर्य को कोई सलाम नहीं करता" को झुठलाती है, साथ ही एक सन्देश भी मिलता है कि हमे अपने बुजुर्गो का ख्याल अपने नवजात से पहले करना चाहिये |

एक छोटी सी भोजपुरी कविता मैने छठ पूजा पर विशेष लिखा था वह आपके आशीर्वाद हेतु नीचे लिख रहा हूँ ...

सगरे जॅहा मे जवन कही ना होला,
होला ऊ, यू.पी.आऊर बिहार मे ,
डूबत सूरुज के पूजा होला,
छठी के त्योहार मे I

छठ के परसाद घर घर बाँटे के,
चलन बा हमनी के परिवार मे,
सगरे जॅहा मे जवन कही ना होला,
होला ऊ, यू.पी.आऊर बिहार मे I

डूबत सूरुज के पूजा कईला के,
संदेश जाला सारा संसार मे ,
बॅड बुजुर्ग के आदर कईल ,
शामिल बा,हमनी के संस्कार मे,

सगरे जॅहा मे जवन कही ना होला,
होला ऊ, यू.पी.आऊर बिहार मे,
डूबत सूरुज के पूजा होला,
छठी के त्योहार मे I
( हलाकि अब तो यह त्यौहार पूरे भारत मे मनाया जाने लगा है )

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Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on November 16, 2010 at 10:36am
वाह गणेश भैया वाह....क्या बात है...छठ पूजा का एक अपना अलग ही बात होता है...सुर्य की पूजा और भी बहुत कुछ.....एक फोटो मेरी तरफ से भी राँची की ही है जहाँ मेरी 2 बुआ एक ही साथ छठ करती हैं......

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