For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

शहर के बड़े चैराहे पर

जो बड़ी दीवार है

उसके पास से गुजरते हुए

अक्सर मन होता है

लिख दूं उस पर

‘लोकतंत्र’

लाल स्याही से।

 

एक बड़ा लाल चमकता हुआ

‘लोकतंत्र’

जो दूर से साफ चमके।

 

जब भी होता हूं वहां

कांव कांव करता एक कौआ

आ बैठता है दीवार पर

मानो आहवाहन करता हो

‘आंव, आंव

लिख दो इस दीवार पर

जग जाएं पशु, पक्षी, लोग

ढूंढकर निकाली जा सके

फाइलों और योजनाओं के

बोझ तले दबी जनता’।

 

कभी कभी हाथ उठते भी हैं

लेकिन कायर दिमाग

अनुमति नहीं देता।

 

दिमाग याद करता है

जब एक कवि ने

कोशिश की थी पहले

‘लोकतंत्र’ लिखने की

इसी दीवार पर।

अभी लिख ही पाया था ‘ल’

कि मिटा दी गयी इबारत

पोत दी गयी दीवार

झक सफेद रंग से।

वह कवि

तब से गायब है।

           - बृजेश नीरज

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 806

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश नीरज on July 5, 2013 at 9:26pm

आदरणीया कुंती जी आपकी विस्तृत टिप्पणी ने साहस बढ़ाया। आपके शब्दों से लगा कि मेरा प्रयास कुछ सफल हुआ।
आपका हार्दिक आभार!
सादर!

Comment by coontee mukerji on July 5, 2013 at 8:43pm

आपकी रचना की लय पर थिरखती आखें जब अचानक विराम पाकर रुकती है तो दिमाग कुछ पल के लिये रुक जाता है और दिल सोचने पर मजबूर हो जाता है कि वक्त के गर्त में न जाने कितनी ऐसी आवाज़ें दफ़न है जो उठने से पहले ही दबा दी गयी है........कवि की क्रांतिकारी दिमाग कभी चुप बैठने वाला नहीं है.

वाक्य विन्यास व शैली का क्रम लय में कोई बाधक नहीं.

ठांव ठांव ...आंव आंव जैसे युग्म शब्द इस रचना में जान फूक दी है.

भाव और रचना का उद्देश्य स्पष्ट है.

कवि की क्रांतिकारी हृदय को सार्थक करता है.

कुल मिलाकर एक स्वस्थ व सफ़ल प्रस्तुति.

सादर

कुंती.

Comment by बृजेश नीरज on July 5, 2013 at 7:19pm

आदरणीय राम भाई आपका हार्दिक आभार!

Comment by ram shiromani pathak on July 5, 2013 at 7:18pm

आदरणीय भाई ब्रिजेश जी बहुत ही सत्य व् सटीक बात कही है आपने/
/हार्दिक बधाई आपको ///बहुत ही सुन्दर रचना //सादर////

Comment by बृजेश नीरज on July 5, 2013 at 5:48pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी आपका हार्दिक आभार!
आपका आशीष मेरे लिए वरदान सरीखा है।
सादर!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 5, 2013 at 5:38pm

ब्रजेश जी यहाँ हर कोई अकेला चना है ,क्यों की संगठन भी विफल होते देखे गए हैं  कैसे सामना करेगा भ्रष्ट शासन तंत्र का ? अच्छा कटाक्ष किया है आक्रोशित मन से निकले भाव बहुत बढ़िया बधाई 

Comment by बृजेश नीरज on July 5, 2013 at 5:36pm

आदरणीय निकोर साहब आपका हार्दिक आभार! आपका आशीष मुझे सदैव बल प्रदान करता है।
सादर!

Comment by बृजेश नीरज on July 5, 2013 at 5:34pm

आदरणीय जितेन्द्र जी आपका हार्दिक आभार! आप जैसा पाठक ही हम जैसों को हौसला प्रदान करता है।
सादर!

Comment by बृजेश नीरज on July 5, 2013 at 5:33pm

आदरणीय लाडलीवाल जी आपका हार्दिक आभार! आपकी कुण्डलियां बहुत सुन्दर हैं।
सादर!

Comment by बृजेश नीरज on July 5, 2013 at 5:31pm

आदरणीय बसंत जी आपका हार्दिक आभार!
आपसे एक निवेदन कि कृपया सर सम्बोधन न प्रयोग किया करें मेरे लिए। मैं बहुत छोटा आदमी हूॅं और ब्रिटेन की सरकार ऐसे छोटे मोटे लोगों को यह पदवी नहीं देती। :))))))))))))

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्र को साकार करती बहुत सुंदर चौपाइयाँ हुई हैं। बहुत बहुत…"
28 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, यह संशोधित छंद और भी उत्तम हुए हैं। यह पूर्ण रूप से चित्र को संतुलित कर रहे हैं।…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्र पर सुंदर छंद हुए हैं । हार्दिक बधाई।"
1 hour ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ( संशोधित) +++++++++++++++ स्थान एक तीरथ लगता है। जमघट संतों का रहता है॥ कितनी सुंदर है…"
1 hour ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  आपका कहन सही है। इतनी सुंदर  गोरी चिट्टी  कन्या पर ध्यान ही नहीं…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई ****** करे मरम्मत चप्पल- जूते । चलता जीवन इसके बूते।।दोजून कभी खाता काके। और कभी हो जाते…"
7 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"   आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र पर आपने सुन्दर…"
17 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई * बन्द शटर हैं  खुला न ताला।। दृश्य सुबह का दिखे निराला।।   रूप  मनोहर …"
22 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"शुभ प्रभात,  आदरणीय! चौपाई छंद:  भेदभाव सच सदा न होता  वर्ग- भेद कभी सच न…"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद +++++++++ करे मरम्मत जूते चप्पल। काम नित्य का यही आजकल॥ कटे फटे सब को सीता है। सदा…"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
yesterday
Admin posted discussions
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service