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जब छोटी सी है दुनिया तुम्हारी

जब छोटी सी है दुनिया तुम्हारी
तो अनंत संसार में तुम्हारा क्या

जब मेंडक हो तुम कूंए के
तो दरिया क्या और किनारा क्या

जब भूल चुके हो अपनों को
तो संसार में तुमको प्यारा क्या

जब कूंद चुके हो दंगल में
तो दुश्मन क्या और यारा क्या

जब बाँट रहे खुले हाथों से
तो थोड़ा क्या और सारा क्या

जब धुल लिखी है किस्मत में
तो ज़मीन से ज्यादा न्यारा क्या

जब दुनिया का है इश्वर वो
तो मेरा क्या और तुम्हारा क्या

जब खेल हो अपने यारों से
तो जीता क्या और हारा क्या

जब डूबना ही है समुन्दर में
तो तिनके का भी सहारा क्या

जब मुक्त हो तुम इन नैनन से
तो अँधियारा क्या उजियारा क्या

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Comment

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Comment by Bhasker Agrawal on December 30, 2010 at 11:20am

देखते हैं नविन जी क्या होता है...

लोकतंत्र ऐसा विषय है जिसके बारे में मैंने न तो ज्यादा सोचा है और न कभी लिखा है..

कोशिश करूंगा अगर कुछ लिख सकू

Comment by Bhasker Agrawal on December 29, 2010 at 5:42pm
धन्यवाद लता जी
धन्यवाद रवि जी
Comment by Rash Bihari Ravi on December 29, 2010 at 4:42pm
bahut khub sandar bhaskar ji
Comment by Lata R.Ojha on December 29, 2010 at 3:42pm
बहुत खूब भास्कर जी ..बहुत ही सुंदर रचना .. 

कृपया ध्यान दे...

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