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हौंसला चाहिए ...........................

हौंसला चाहिए जहाँ में मोहब्बत पाने के लिए !

मोहब्बत जताने के लिए , मोहब्बत निभाने के लिए !

रुश्वायियाँ मिला नही करती खैरात में !

इज्ज़त से भी खेलना पड़ता है , इन्हें पाने के लिए !

बहुत मशहूर है शराबी अपने हाल पर !

हस्ती भी मिट जाती है , ये शोहरत पाने के लिए !

दिल का हाल कभी उस बाजारू नारी से पूछो !

मजबूर होती है जो बाज़ार में बिक जाने के लिए !

बस्ती मिटाने वालो पलभर को तो जरा सोच लो !

जवानी बुढापे में बदल जाती है एक आशियाँ बनाने के लिए !

सफ़र की कीमत उस पंछी से पूछ लो !

जो मीलो उड़ा हो सूरज को पाने के लिए !

गुजरा वक़्त कभी फिर वापस नही लौटता !

 ना जाने क्यों ठहरा है आज मुझे रुलाने के लिए !

मंजिल की तमन्ना किस मुसाफिर को नही दोस्तों !

मगर कोई तो हमराह चाहिए साथ निभाने के लिए !

हम तो अपनों पे ही भरोसा करके खुद को लुटा बैठे !

वरना दुश्मन तो कोई था ही नही हराने के लिए !

जिद है की अब हम भी तुर्बत से ना निकलेंगे बाहर !

लाख दिए जला ले वो हमको मनाने के लिए !

 

------------------डॉ. अनुराग सैनी --------------------

मौलिक व अप्रकाशित

 

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Comment

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Comment by डॉ. अनुराग सैनी on September 30, 2013 at 6:28pm

बहुत बहुत शुक्रिया जितेन्द्र जी 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 30, 2013 at 8:35am

बेहद सुंदर गजल, बधाई स्वीकारें आदरणीय अनुराग जी

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on September 29, 2013 at 2:24pm

शुक्रिया आपका 

Comment by Meena Pathak on September 28, 2013 at 7:46pm

गुजरा वक़्त कभी फिर वापस नही लौटता !

 ना जाने क्यों ठहरा है आज मुझे रुलाने के लिए !

मंजिल की तमन्ना किस मुसाफिर को नही दोस्तों !

मगर कोई तो हमराह चाहिए साथ निभाने के लिए !

बहुत सुन्दर .... हार्दिक बधाई स्वीकारें 

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on September 28, 2013 at 7:12pm

बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by annapurna bajpai on September 28, 2013 at 5:49pm

सुंदर गज़ल बधाई आपको आदरणीय अनुराग जी । 

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