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निगाहें फेर लो , कि पल भर सुकून मेरे तडपते दिल को मिले !

तेरी नजरों की तपिस मुझसे सही नही जाती !

 

मेरी  बेवफाई को हो रहा है शोर जमाने में , की तू भी मुझे बेवफा कहे !

बात सच है मगर लबों पर तेरे  नहीं आती ! 

 

होकर बेसुध सोये थे कभी तेरे बांहों के घेरो में, अब ना तु बांहे फैला !

ये सच है की गुजरी घडी कभी लौटकर नही आती ! 

 

सुना है कि गमजदा है तु बीते पलो की ख्वाईस में, कि अब उनको भुला दे !

मुझे तो पल भर के लिए भी याद तेरी नही आती !

 

मेरा तुझसे बिछड़ना लिखा था नसीब में , कि सच मान ले !

होनी ,अनहोनी जो लिखी है वो टाली नही जाती !

 

 

रचना ---------------डॉ. अनुराग सैनी -------------------

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by डॉ. अनुराग सैनी on September 27, 2013 at 10:16pm

हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया!

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on September 27, 2013 at 12:30am

प्रिय डॉ अनुराग जी ...
होकर बेसुध सोये थे कभी तेरी बांहों के घेरो में, अब ना तू बांहे फैला !
ये सच है कि गुजरी घड़ी कभी लौटकर नही आती !
सुन्दर भाव ..ऐसा भी हो जाता है
भ्रमर ५


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 26, 2013 at 9:32pm

आदरणीय अनुराग भाई , बहुत सुन्दर गीत रचना के लिये हार्दिक बधाई !!

Comment by रविकर on September 26, 2013 at 5:28pm

मेरी बेवफाई का हो रहा है शोर जमाने में-

बहुत बढ़िया आदरणीय-
शुभकामनायें-

कृपया ध्यान दे...

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