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माँ !! ( लघु कविता )

माँ !!

 

नेह ममता

लाड़  दुलार

अविस्मरण रूप

स्नेह की गागर

छलकाती ।

 

आँखों मे असंख्य

अबूझ स्वप्न

स्नेह सिक्त

जल धारा बरसाती ।

होती ऐसी माँ !!!..................अन्नपूर्णा बाजपेई 

 

अप्रकाशित एवं मौलिक 

Views: 888

Comment

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Comment by annapurna bajpai on October 7, 2013 at 12:08am

आ0 प्राची जी आपका हार्दिक आभार । 

Comment by annapurna bajpai on October 7, 2013 at 12:08am

आ0 अरुण शर्मा जी आपका हार्दिक आभार । 

Comment by annapurna bajpai on October 7, 2013 at 12:07am

आदरणीय आशीष जी आपका हार्दिक आभार । 

Comment by annapurna bajpai on October 7, 2013 at 12:06am

  आदरणीय बृजेश जी आपका आभार । 

Comment by annapurna bajpai on October 7, 2013 at 12:05am

आदरणीय जितेंद्र जी आपका आभार । 

Comment by annapurna bajpai on October 7, 2013 at 12:04am

आदरनीया कुंती जी आपका हार्दिक आभार । 

Comment by annapurna bajpai on October 7, 2013 at 12:04am

  आदरणीय सौरभ जी आपका हार्दिक आभार । 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 6, 2013 at 3:27pm

सुन्दर प्रस्तुति 

हार्दिक बधाई आ० अन्नपूर्णा जी 

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 5, 2013 at 10:59pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी बहुत ही सुन्दर रचना माँ को समर्पित की है आपने बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on October 5, 2013 at 10:17pm

सुन्दर कविता हेतु बधाई अन्नपूर्णा जी !

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